ट्रम्प का ग्रीन कार्ड फ्रीज अवैध घोषित: अमेरिकी कोर्ट का बड़ा फैसला

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AuthorNeha Patil|Published at:
ट्रम्प का ग्रीन कार्ड फ्रीज अवैध घोषित: अमेरिकी कोर्ट का बड़ा फैसला

एक बड़ी राहत देते हुए, अमेरिका के एक फेडरल जज ने पूर्व राष्ट्रपति ट्रम्प के 75 देशों के ग्रीन कार्ड आवेदन फ्रीज करने के फैसले को गैरकानूनी करार दिया है। यह फैसला हाल की इमिग्रेशन नीतियों को एक बड़ी कानूनी चुनौती देता है। निवेशकों के लिए यह इसलिए मायने रखता है क्योंकि भारतीय आईटी कंपनियों के लिए वर्कफोर्स की गतिशीलता और कुशल पेशेवरों की आवाजाही के लिए वीजा की निश्चितता बेहद जरूरी है।

क्या है पूरा मामला?

31 जुलाई 2026 को, अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट जज अमित मेहता ने एक ऐसा फैसला सुनाया है जिसके अंतरराष्ट्रीय वीजा आवेदकों, जिनमें भारत के लोग भी शामिल हैं, पर बड़े असर पड़ सकते हैं। कोर्ट ने माना कि ट्रम्प प्रशासन की 'पब्लिक चार्ज' नियम के तहत 75 देशों के ग्रीन कार्ड आवेदनों को फ्रीज करने की नीति गैरकानूनी थी। जज ने कहा कि स्टेट डिपार्टमेंट ने कंस्लर अफसरों की स्वतंत्र निर्णय लेने की शक्ति को हटाकर अपने कानूनी अधिकार का उल्लंघन किया है।

भारतीय निवेशकों के लिए क्यों है अहम?

भारतीय निवेशकों के लिए यह फैसला आईटी और सर्विस सेक्टर पर पड़ने वाले असर के चलते बेहद महत्वपूर्ण है। भारत की बड़ी आईटी कंपनियां अमेरिका में रोजगार-आधारित वीजा पर आने वाले कुशल पेशेवरों की निरंतर आपूर्ति पर निर्भर करती हैं। जब वीजा प्रक्रियाएं फ्रीज या प्रतिबंधित हो जाती हैं, तो कंपनियों को टैलेंट को वहां भेजने में अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है, जिससे प्रोजेक्ट में देरी और ऑपरेटिंग खर्च बढ़ सकता है। यदि वीजा के रास्ते बंद या अप्रत्याशित बने रहते हैं, तो कंपनियों को अमेरिका में महंगे स्थानीय टैलेंट को नियुक्त करना पड़ सकता है या काम को दूसरे क्षेत्रों में शिफ्ट करना पड़ सकता है, जिससे उनके प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव आ सकता है।

केस और कानूनी पहलू

यह मामला, 'डी मौरा गोम्स बनाम रुबियो' (De Moura Gomes v. Rubio), एक EB-5 इमिग्रेंट इन्वेस्टर वीजा आवेदन पर केंद्रित था। कोर्ट ने यह तय किया कि सरकार की नीति 1952 के इमिग्रेशन एंड नेशनैलिटी एक्ट (INA) का उल्लंघन करती है। आवेदनों के अप्रूवल को मुख्यालय स्तर पर केंद्रीकृत करके, प्रशासन ने कंस्लर अफसरों के उस व्यक्तिगत विवेक को खत्म कर दिया था जिसे संघीय कानून के तहत उन्हें प्रयोग करना आवश्यक है।

आगे क्या?

हालांकि यह फैसला एक बड़ी कानूनी जीत है, लेकिन यह अभी केवल व्यक्तिगत वादी के मामले तक सीमित है, न कि सभी वीजा श्रेणियों के स्वतः राष्ट्रीय स्तर पर फिर से खुलने का आदेश। प्रशासन इस नीति को संशोधित करने या फैसले के खिलाफ अपील करने का प्रयास कर सकता है, जिसका मतलब है कि रेगुलेटरी अनिश्चितता बनी रह सकती है। निवेशकों के लिए, मुख्य बात यह होगी कि अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट इस कानूनी चुनौती पर कैसी प्रतिक्रिया देता है और क्या वह कोर्ट के आदेश का पालन करने के लिए अपनी आंतरिक गाइडलाइन्स में बदलाव करता है। तब तक, कंपनियां और आवेदक अंतरराष्ट्रीय टैलेंट मोबिलिटी के संबंध में नीतिगत अस्थिरता के दौर में रहेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.