अमेरिकी कोर्ट ने गौतम अडानी, उनके भतीजे सागर अडानी और पूर्व Adani Green CEO विनीत जैन के खिलाफ लगे आपराधिक आरोपों को खारिज कर दिया है। यह फैसला निवेशकों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, क्योंकि पिछले लगभग दो सालों से यह कानूनी मामला Adani Group के सेंटिमेंट पर भारी पड़ रहा था।
अमेरिकी कोर्ट का बड़ा फैसला
न्यूयॉर्क की एक डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने 10 अगस्त 2026 को एक अहम फैसला सुनाते हुए अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी, उनके भतीजे सागर अडानी और Adani Green के पूर्व CEO विनीत जैन के खिलाफ दर्ज आपराधिक केस को खारिज कर दिया है। यह मामला नवंबर 2024 से चल रहा था। अमेरिकी न्याय विभाग (US Department of Justice) की गुजारिश पर कोर्ट ने यह इंडिक्टमेंट 'विद प्रेजुडिस' (with prejudice) यानी इस तरह खारिज किया है कि अब इन आरोपों पर दोबारा केस नहीं चलाया जा सकेगा।
आरोपों के खारिज होने की वजह
सरकारी वकीलों ने कोर्ट में बताया कि उनके पास इस केस को आगे बढ़ाने में कई दिक्कतें आ रही थीं। इनमें ज्यूरिस्डिक्शन (jurisdiction) यानी अधिकार क्षेत्र और सबूतों से जुड़ी चुनौतियां शामिल थीं। साथ ही, यह भी पाया गया कि कथित घटनाओं से किसी भी निवेशक को कोई सीधा नुकसान नहीं हुआ था। हालांकि, कोर्ट ने आरोपियों की बेगुनाही पर कोई फैसला नहीं सुनाया है, यह केवल सरकार की तरफ से केस वापस लेने का एक प्रक्रियात्मक कदम था।
निवेशकों की चिंताएं खत्म
यह फैसला अडानी ग्रुप और इसके निवेशकों के लिए पिछले करीब दो सालों से चल रही एक बड़ी कानूनी अनिश्चितता को खत्म करता है। 2024 के अंत में आरोप लगने के बाद से ही ग्रुप के कारोबार और निवेशक सेंटिमेंट पर असर पड़ रहा था। इस केस के बंद होने से अब ग्रुप अपने बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और कैपिटल-इंटेंसिव (capital-intensive) बिजनेस प्लान्स पर बिना किसी रुकावट के ध्यान केंद्रित कर सकेगा। अडानी ग्रुप ने भारतीय स्टॉक एक्सचेंजों, NSE और BSE को भी इस फैसले की सूचना दे दी है।
आगे क्या?
हालांकि केस खत्म हो गया है, लेकिन सुनवाई के दौरान जज ने न्याय विभाग द्वारा मामले को संभालने के तरीके पर चिंता जताई थी, जिससे यह मामला सार्वजनिक और राजनीतिक चर्चा का विषय बना रहेगा। कानूनी अनिश्चितता कम होने के बावजूद, ग्रुप को अपने जटिल और पूंजी-गहन व्यवसायों को चलाने की सामान्य चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। निवेशक अब कंपनी के बिजनेस फंडामेंटल्स, जैसे प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन, कर्ज प्रबंधन और भविष्य की विस्तार योजनाओं के लिए पूंजी जुटाने की क्षमता पर अपना ध्यान केंद्रित करेंगे।
बाजार की नजर अब ग्रुप के मैनेजमेंट की भविष्य की बिजनेस स्ट्रैटेजी पर होगी। यह डेवलपमेंट ग्रुप की पूंजी जुटाने की क्षमता और आने वाली तिमाहियों में उसके ऑपरेशनल फोकस को कैसे प्रभावित करता है, यह देखना भी अहम होगा। कानूनी डर भले ही कम हो गया हो, लेकिन ग्रुप का प्रदर्शन उसके ऑपरेशनल डिलीवरी और फाइनेंशियल डिसिप्लिन पर ही निर्भर करेगा।
