मैनहट्टन की एक फेडरल कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन द्वारा राजनीतिक विज्ञापनों में सरकारी फंड के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। प्रशासन पर आरोप है कि उन्होंने **$2 करोड़** का गलत इस्तेमाल किया है, जिसके बाद अब विज्ञापनों के लिए निजी फंड (MAGA PAC) का सहारा लिया जाएगा।
कोर्ट का बड़ा फैसला
अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट जज जेनिफर एल. रोचोन ने 11 अक्टूबर, 2026 को एक टेम्परेरी रिस्ट्र्रेनिंग ऑर्डर जारी करते हुए ट्रंप प्रशासन के सरकारी पैसों से चलने वाले विज्ञापनों पर रोक लगा दी है। यह फंड मूल रूप से डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) के लिए आवंटित किया गया था, जिसका इस्तेमाल 3 नवंबर, 2026 के मिड-टर्म चुनावों से ठीक पहले राजनीतिक प्रचार के लिए किया जा रहा था।
सरकारी खजाने के दुरुपयोग का आरोप
इस मामले को कॉमन कॉज (Common Cause) जैसी संस्थाओं और अन्य वादियों ने कोर्ट में चुनौती दी थी। उनका तर्क था कि ये विज्ञापन जनहित के बजाय राजनीतिक प्रोपेगेंडा थे। वादियों ने दावा किया कि होमलैंड सिक्योरिटी के फंड को डायवर्ट करना फेडरल स्पेंडिंग गाइडलाइंस और 'एंटी-डेफिशिएंसी एक्ट' का उल्लंघन है।
अब आगे क्या?
कोर्ट के फैसले के बाद व्हाइट हाउस ने पुष्टि की है कि भविष्य के विज्ञापनों का खर्च 'MAGA PAC' (निजी पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) से उठाया जाएगा। हालांकि, जो $2 करोड़ पहले ही खर्च किए जा चुके हैं, उन्हें वापस सरकारी खजाने में जमा करने पर अभी तक कोई आश्वासन नहीं मिला है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
बाजार और निवेशकों के लिए यह घटना 'गवर्नेंस' और 'फिस्कल अकाउंटेबिलिटी' के नजरिए से अहम है। मिड-टर्म चुनावों के माहौल में इस तरह के विवाद राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ाते हैं। हालांकि $2 करोड़ की राशि बहुत बड़ी नहीं है, लेकिन सरकारी धन के प्रबंधन पर कड़ी निगरानी और संस्थागत जवाबदेही (Institutional Oversight) का यह मामला भविष्य में आने वाली किसी भी बड़ी कानूनी और रेपुटेशनल रिस्क की ओर इशारा करता है।
