अमेरिकी कोर्ट ने ट्रम्प प्रशासन के उस नियम को रद्द कर दिया है, जिसके तहत सरकारी नौकरी के उम्मीदवारों के लिए पॉलिसी सपोर्ट पर एसे (essay) लिखना अनिवार्य था। यह फैसला **70,000** से ज्यादा जॉब पोस्टिंग को प्रभावित करता है।
अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के जज जॉर्ज ओटूल ने एक अहम आदेश जारी करते हुए उस सरकारी निर्देश पर रोक लगा दी है, जिसमें गैर-राजनीतिक सरकारी नौकरियों के उम्मीदवारों से यह लिखवाया जा रहा था कि वे ट्रम्प प्रशासन की नीतियों का समर्थन कैसे करेंगे। इस फैसले ने भर्ती प्रक्रिया में 'लॉयल्टी सवालों' के इस्तेमाल को तत्काल प्रभाव से रोक दिया है।
क्यों हुआ विवाद?
यह फैसला उन यूनियनों की याचिका के बाद आया है, जिनमें AFGE और AFSCME जैसे बड़े संगठन शामिल हैं। इनका तर्क था कि यह अनिवार्य एसे सिस्टम मेरिट-आधारित सिविल सर्विस को राजनीतिक बना रहा था। जज ने इसे फ्री स्पीच अधिकारों का उल्लंघन और न्यूट्रल ब्यूरोक्रेसी के सिद्धांतों के खिलाफ माना है।
निवेशकों के लिए क्या है मायने?
भले ही यह मामला सीधे किसी शेयर से न जुड़ा हो, लेकिन सरकारी एजेंसियों के कामकाज में होने वाली कोई भी बाधा सीधे तौर पर सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स पर काम करने वाली कंपनियों—जैसे डिफेंस, इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी सेक्टर—के लिए रिस्क पैदा कर सकती है। 70,000 से अधिक पदों पर चल रही भर्ती प्रक्रिया के रुकने या दोबारा शुरू होने से फाइलें आगे बढ़ने, प्रोजेक्ट्स के अप्रूवल और एडमिनिस्ट्रेटिव कामकाज में देरी हो सकती है। अब बाजार की नजर इस पर है कि क्या प्रशासन इस फैसले को चुनौती देगा या भर्ती गाइडलाइंस में क्या बदलाव करेगा।
