US-based AI फर्म Anthropic PBC ने बेलगावी कोर्ट में यह स्वीकार कर लिया है कि Anthropic India उसकी सब्सिडियरी है। यह ट्रेडमार्क विवाद में एक बड़ा मोड़ है, जो कंपनी के आगामी IPO से पहले कानूनी मुश्किलें खड़ी कर सकता है।
कानूनी दांव-पेच में फंसी कंपनी
बेलगावी की 8वीं एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस कोर्ट में अमेरिकी AI कंपनी Anthropic PBC ने अब आधिकारिक तौर पर माना है कि Anthropic India Pvt Ltd उनकी ही सहायक कंपनी है। इस खुलासे के बाद से उस कानूनी उलझन को सुलझाने का रास्ता साफ हुआ है, जो पहले समन (summons) तामील करने के मामले में बाधा बनी हुई थी।
विवाद की जड़ क्या है?
यह लड़ाई बेलगावी स्थित Anthropic Softwares Pvt Ltd के साथ चल रही है, जो 2017 में इनकॉर्पोरेट हुई थी। भारतीय कंपनी का तर्क है कि उन्होंने अमेरिकी AI डेवलपर (जो 2021 में बनी) के भारत में 2024 में आने से काफी पहले 'Anthropic' ब्रांड नाम के तहत अपनी पहचान बना ली थी। निवेशकों के लिए यह एक बड़ा सबक है कि कैसे अंतरराष्ट्रीय विस्तार के दौरान ब्रांड आइडेंटिटी के विवाद कंपनी के ऑपरेशंस को प्रभावित कर सकते हैं।
IPO पर मंडराते खतरे
Anthropic फिलहाल एक प्राइवेट कंपनी है, लेकिन 2026 में इसके बहुप्रतीक्षित IPO की तैयारी जोरों पर है। कंपनी ने जून 2026 में US Securities and Exchange Commission के पास गोपनीय दस्तावेज फाइल किए हैं, और उम्मीद है कि नवंबर 2026 तक यह पब्लिक लिस्टिंग हो सकती है। हालांकि, बौद्धिक संपदा (Intellectual Property) से जुड़े ऐसे कानूनी विवाद कंपनी की रिस्क प्रोफाइल को बढ़ा सकते हैं, जिसका असर भविष्य के शेयरधारकों पर पड़ सकता है।
वित्तीय चुनौतियां और आगे का रास्ता
सिर्फ अदालत ही नहीं, कंपनी जनरेटिव AI सेक्टर की भारी-भरकम इंफ्रास्ट्रक्चर लागत और बड़े नुकसान से भी जूझ रही है। इन्हें बनाए रखने के लिए लगातार फंडिंग की जरूरत है, ऐसे में भारत जैसे अहम बाजार में कानूनी रुकावटें कंपनी के प्रॉफिटेबल बनने के सफर को कठिन बना सकती हैं। फिलहाल कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 13 नवंबर 2026 तक टाल दी है।
