ब्रिटेन की कॉम्पिटिशन अपील ट्रिब्यूनल (CAT) ने Apple और Amazon के खिलाफ एक बड़े क्लास-एक्शन मुकदमे को आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी है। आरोप है कि दोनों कंपनियों के बीच हुए 2018 के एग्रीमेंट्स से मार्केट में प्रतिस्पर्धा घटी और ग्राहकों को महंगे प्रोडक्ट्स खरीदने पड़े। अब इन कंपनियों पर **£306 मिलियन** (करीब 3,300 करोड़ रुपये) की देनदारी का खतरा मंडरा रहा है।
मामला क्या है?
यह पूरा विवाद 2018 में हुए एक समझौते से जुड़ा है। आरोप है कि Apple और Amazon के बीच हुई एक डील ने तीसरे पक्ष (third-party) के सेलर्स को Amazon UK प्लेटफॉर्म पर Apple और Beats-ब्रांडेड प्रोडक्ट्स बेचने से रोक दिया था। जज केलिन बेकन के नेतृत्व वाली ट्रिब्यूनल ने पाया कि इन दावों में दम है और अब यह केस ट्रायल के लिए आगे बढ़ेगा। क्लास रिप्रेजेंटेटिव जस्टिन ले पाटौरेल के नेतृत्व में यह लड़ाई लड़ी जा रही है, जिसमें कुल संभावित हर्जाना £289 मिलियन से £306 मिलियन के बीच आंका गया है।
अदालत ने क्या सीमा तय की?
हालांकि ट्रिब्यूनल ने केस को अनुमति दी है, लेकिन इसका दायरा सीमित रखा है। अदालत ने उन दावों को खारिज कर दिया है जिनमें Apple के अपने रिटेल स्टोर्स या अन्य थर्ड-पार्टी चैनल्स पर कीमत बढ़ने की बात कही गई थी। इसका मतलब यह है कि सुनवाई केवल उस असर पर केंद्रित होगी जो Amazon के मार्केटप्लेस पर इन एक्सक्लूसिव समझौतों की वजह से ग्राहकों की जेब पर पड़ा है।
ग्लोबल रेगुलेटरी दबाव
यह मामला सिर्फ एक कानूनी लड़ाई नहीं है, बल्कि ग्लोबल टेक दिग्गजों के लिए बढ़ रही रेगुलेटरी सख्ती का संकेत है। भारत में भी Competition Commission of India (CCI) समय-समय पर Amazon और Flipkart जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों की बिजनेस प्रैक्टिसेज, जैसे कि 'डीप डिस्काउंटिंग' और पसंदीदा सेलर्स को बढ़ावा देने के मामलों की जांच करती रही है। अगर यह केस प्रभावित होता है, तो Apple और Amazon को भविष्य में दुनिया भर में अपनी स्ट्रैटेजी और कॉन्ट्रैक्ट्स में बड़े बदलाव करने पड़ सकते हैं, जो निवेशकों के नजरिए से काफी महत्वपूर्ण है।
