UK Asylum Appeals: अब सिर्फ 24 हफ्तों में होगा फैसला, सरकार को ₹6.9 अरब बचाने की उम्मीद

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AuthorAditya Rao|Published at:
UK Asylum Appeals: अब सिर्फ 24 हफ्तों में होगा फैसला, सरकार को ₹6.9 अरब बचाने की उम्मीद

ब्रिटेन की सरकार ने शरण और आप्रवासन (Immigration) अपीलों के निपटान के लिए 24 हफ्तों का लक्ष्य तय किया है। इससे मौजूदा 67 हफ्तों के औसत इंतजार को कम करने की उम्मीद है। यह नीति अगस्त 2026 से लागू होगी और शरण आवास पर सरकारी खर्च में लगभग **₹6.9 अरब** की कमी ला सकती है।

कैसे कम होगा खर्च?

यूके के होम ऑफिस ने अगस्त 2026 से लागू होने वाले एक नए नियम के तहत कुछ शरण और आप्रवासन अपीलों के फैसलों के लिए 24 हफ्तों की समय-सीमा तय कर दी है। यह बदलाव खासतौर पर फर्स्ट-टियर ट्रिब्यूनल (First-tier Tribunal) में चल रहे उन मामलों पर लागू होगा जिनमें विदेशी अपराधी (foreign national offenders) शामिल हैं और जो हिरासत में नहीं हैं, या वे व्यक्ति जो सरकारी सहायता और आवास का लाभ उठा रहे हैं।

इस नीति के पीछे मुख्य मकसद सरकारी खजाने पर बोझ कम करना है। सरकार का अनुमान है कि इन फैसलों में तेजी लाने से सरकारी आवासों के इस्तेमाल में कमी आएगी, जिससे टैक्सपेयर्स के लगभग £6.9 अरब बचेंगे। यूके सरकार वैसे भी शरण चाहने वालों को होटलों से बाहर निकालने की कोशिश कर रही है और 2024 के मध्य से होटलों की संख्या में काफी कमी भी आई है।

सिस्टम में देरी और सुधार

फिलहाल, आप्रवासन अपीलों की प्रक्रिया में भारी देरी हो रही है, जहां मामलों को सुलझाने में औसतन 67 हफ्ते लग जाते हैं। इस देरी के कारण उन लोगों को वापस भेजने की प्रक्रिया जटिल हो गई है, जिन्हें यूके में रहने का अधिकार नहीं है। इस समस्या से निपटने के लिए, सरकार अपीलीय प्रणाली की क्षमता बढ़ा रही है। इसमें इस साल फर्स्ट-टियर ट्रिब्यूनल के सिटिंग डेज (sitting days) में 19% की बढ़ोतरी की योजना भी शामिल है।

इसके अलावा, इमिग्रेशन और एसाइलम बिल (Immigration and Asylum Bill) के जरिए विधायी सुधार भी आगे बढ़ रहे हैं, जो वर्तमान में संसद में विचाराधीन है। इस बिल में एक स्वतंत्र आप्रवासन अपील प्राधिकरण (Independent Immigration Appeals Authority - IIAA) बनाने का प्रस्ताव है। IIAA का उद्देश्य मौजूदा ट्रिब्यूनल प्रणाली के साथ मिलकर प्रक्रिया को सरल और तेज बनाना है, खासकर विदेशी अपराधियों और जटिल मानवाधिकार दावों (human rights claims) जैसे जरूरी मामलों को प्राथमिकता देना। वर्तमान में 1,50,000 से अधिक अपीलें लंबित हैं, और इन संरचनात्मक बदलावों का लक्ष्य पिछली प्रणाली की तुलना में बैकलॉग को अधिक कुशलता से साफ करना है।

अन्य महत्वपूर्ण बातें

यूके आप्रवासन के रुझानों पर नजर रखने वालों के लिए, हालिया आंकड़ों से पता चलता है कि शरण अनुदान दर (asylum grant rates) राष्ट्रीयता के अनुसार काफी भिन्न होती है, जिसमें भारतीय नागरिकों के लिए यह दर लगभग 1% दर्ज की गई है। सरकार अपनी व्यापक आप्रवासन ढांचे को आकार देने के लिए ऐसे आंकड़ों का उपयोग करना जारी रखेगी।

निवेशक के नजरिए से, यह नीतिगत अपडेट यूके में सार्वजनिक खर्च और प्रशासनिक दक्षता पर केंद्रित एक मैक्रो-आर्थिक विकास है। इसका सीधे तौर पर NSE या BSE में सूचीबद्ध कंपनियों पर कोई असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि यह नीति मुख्य रूप से सार्वजनिक धन के प्रबंधन और यूके के कानूनी आप्रवासन ढांचे से संबंधित है। यूके की अर्थव्यवस्था पर नजर रखने वालों के लिए मुख्य बात यह होगी कि क्या ट्रिब्यूनल प्रणाली कानूनी प्रक्रिया को बाधित किए बिना महत्वाकांक्षी 24-सप्ताह के लक्ष्य को पूरा करने के लिए अपनी परिचालन क्षमता को सफलतापूर्वक बढ़ा सकती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.