राष्ट्रपति Donald Trump ने 2009 के Fort Hood मास शूटिंग केस के दोषी और पूर्व आर्मी साइकियाट्रिस्ट Nidal Malik Hasan की फांसी को मंजूरी दे दी है। यह पिछले छह दशकों में अमेरिकी सेना द्वारा दी जाने वाली पहली सजा-ए-मौत होगी।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने 2009 में टेक्सास के Fort Hood सैन्य अड्डे पर हुए घातक हमले के दोषी Nidal Malik Hasan को 'फायरिंग स्क्वाड' के जरिए मृत्युदंड देने के आदेश पर मुहर लगा दी है। पेंटागन ने इसकी पुष्टि की है कि यह फैसला वार सेक्रेटरी Pete Hegseth की सिफारिश के बाद लिया गया है।
मामला क्या है?
Nidal Hasan, जो पूर्व में अमेरिकी सेना में साइकियाट्रिस्ट था, को 2013 में एक मिलिट्री जूरी ने दोषी करार दिया था। इस हमले में 13 लोगों की मौत हुई थी और 32 अन्य घायल हुए थे। तब से वह Fort Leavenworth, Kansas की जेल में डेथ रो पर है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
यह कदम मिलिट्री जस्टिस सिस्टम में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है, क्योंकि 1961 के बाद से अमेरिकी सेना ने अपने किसी भी कर्मी को फांसी नहीं दी है। प्रशासन का कहना है कि लीथल इंजेक्शन (Lethal Injection) के लिए दवाओं की कमी जैसे लॉजिस्टिक कारणों के चलते फायरिंग स्क्वाड, इलेक्ट्रिक चेयर और गैस जैसी अन्य विधियों पर विचार किया जा रहा है।
हालांकि, अभी भी इस फैसले के बाद लंबी कानूनी प्रक्रिया बाकी है। सैन्य मौत की सजाओं को अक्सर संघीय अदालतों में कानूनी समीक्षा और अपीलों का सामना करना पड़ता है। फिलहाल आर्मी सेक्रेटरी के पास इस सजा के अमल की तारीख और स्थान तय करने की जिम्मेदारी है।
