New York की अटॉर्नी जनरल ने TikTok पर मुकदमा दर्ज किया है। आरोप है कि कंपनी ने एल्गोरिदम टेस्ट के दौरान करीब **1.5 करोड़** यूजर्स को सेफ्टी फीचर्स से बाहर रखा था।
TikTok के लिए कानूनी मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। New York की अटॉर्नी जनरल Letitia James ने प्लेटफॉर्म के खिलाफ चाइल्ड सेफ्टी को लेकर चल रहे मुकदमे को और बढ़ा दिया है। ताजा शिकायत के अनुसार, 2021 और 2022 में कंपनी ने ऐसे एल्गोरिदम प्रयोग किए, जिसमें जानबूझकर एक बड़े यूजर बेस को सेफ्टी प्रोटोकॉल से दूर रखा गया। कोर्ट फाइल्स के मुताबिक, करीब 1.5 करोड़ यूजर्स—जो कि अमेरिका के कुल यूजर बेस का 10% हैं—उन्हें अपडेटेड सेफ्टी फीचर्स का लाभ नहीं मिला। दावा है कि यह सब केवल इसलिए किया गया ताकि यह पता चल सके कि सेफ्टी फीचर्स हटाने से यूजर एंगेजमेंट और ऐप पर बिताए जाने वाले समय पर क्या असर पड़ता है।
सुरक्षा दांव पर
अभियोजकों का आरोप है कि कंपनी ने सेफ्टी प्रोटोकॉल के बजाय एंगेजमेंट डेटा को प्राथमिकता दी। इस मामले में एक 16 साल के किशोर की आत्महत्या का जिक्र भी किया गया है, जो उस टेस्ट ग्रुप का हिस्सा था जिसे अपडेटेड सेफ्टी कंट्रोल नहीं मिले थे। हालांकि कंपनी इसे सामान्य प्रोडक्ट टेस्टिंग बता रही है, लेकिन रेगुलेटर्स का कहना है कि प्लेटफॉर्म ने सेफ्टी आर्किटेक्चर के बारे में जनता को गुमराह किया है।
भारतीय निवेशकों के लिए क्या है स्थिति?
यह विवाद सोशल मीडिया कंपनियों के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रहा है। Meta Platforms Inc. जैसी बड़ी कंपनियां पहले ही अमेरिकी राज्यों के साथ अरबों डॉलर के सेटलमेंट कर चुकी हैं। भारतीय रिटेल निवेशकों के लिए यह जानना जरूरी है कि TikTok की पेरेंट कंपनी, ByteDance, एक प्राइवेट एंटिटी है। यह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) या बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर लिस्टेड नहीं है। हालांकि इसका भारतीय शेयर बाजार पर सीधा असर नहीं है, लेकिन बढ़ती कानूनी सख्ती और भारी जुर्माने का डर ग्लोबल स्तर पर सोशल मीडिया कंपनियों के वैल्युएशन और बिजनेस मॉडल पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।
