टेक्सास के एक जज ने TikTok के खिलाफ बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि कंपनी ने बच्चों की सुरक्षा और 'रेस्ट्रिक्टेड मोड' को लेकर यूजर्स को गुमराह किया है।
कोर्ट का क्या है मामला?
10 सितंबर, 2026 को टेक्सास के जिला जज ने TikTok के खिलाफ यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने पाया कि कंपनी ने कंज्यूमर प्रोटेक्शन कानूनों का उल्लंघन किया है। हालांकि कंपनी ने सार्वजनिक रूप से सख्त फिल्टरिंग का दावा किया था, लेकिन इंटरनल तौर पर प्रतिबंधित कंटेंट प्लेटफॉर्म पर मौजूद था। कोर्ट ने माना कि कंपनी का 'रेस्ट्रिक्टेड मोड' अपनी जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह विफल रहा है, जिससे नाबालिगों की सुरक्षा खतरे में पड़ी।
भारतीय निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
TikTok, ByteDance की सब्सिडियरी है और भारत के नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) या बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर लिस्टेड नहीं है। इसलिए, इस खबर का भारतीय शेयरों पर कोई सीधा असर नहीं है। हालांकि, यह कानूनी घटनाक्रम पूरी दुनिया के सोशल मीडिया सेक्टर के लिए एक 'लीगल प्रेसिडेंट' (Legal Precedent) साबित हो सकता है। डेटा प्राइवेसी और बच्चों की सुरक्षा को लेकर बढ़ती रेगुलेटरी सख्ती का मतलब है कि बड़ी डिजिटल कंपनियों को अब अपने मॉडर्न आर्किटेक्चर पर भारी खर्च करना पड़ सकता है, जिससे उनका ऑपरेटिंग एक्सपेंस बढ़ सकता है।
कानूनी शिकंजा और जुर्माने का दौर
यह मामला जनवरी 2025 में टेक्सास के अटॉर्नी जनरल Ken Paxton द्वारा शुरू किया गया था। अब अगले महीने कोर्ट में 'पेनल्टी फेज' शुरू होगा, जहां कंपनी पर भारी जुर्माना तय हो सकता है। बता दें कि अगस्त 2026 में ही कंपनी ने प्राइवेसी कानूनों के उल्लंघन के लिए $400 मिलियन का सेटलमेंट किया था। निवेशकों के लिए यह लगातार उठते कानूनी सवाल संकेत हैं कि डिजिटल और टेक सेक्टर में सरकारी नीति और सख्ती का दायरा लगातार बढ़ रहा है।
