तेलंगाना हाई कोर्ट ने बिल्डरों की देरी के चलते अटके प्रोजेक्ट्स में फंसे निवेशकों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि अगर किसी प्रॉपर्टी का कंस्ट्रक्शन डेवलपर की वजह से लेट हो रहा है, तब भी टैक्सपेयर्स सेक्शन 54F के तहत टैक्स छूट का लाभ उठा सकते हैं।
कोर्ट का फैसला क्या कहता है?
तेलंगाना हाई कोर्ट ने इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 54F की व्याख्या पर टैक्सपेयर्स के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है। यह सेक्शन प्रॉपर्टी बेचने से हुए लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स पर टैक्स छूट की अनुमति देता है, बशर्ते कि उस पैसे को एक रेसिडेंशियल प्रॉपर्टी में री-इन्वेस्ट किया जाए। कोर्ट ने साफ किया है कि अगर किसी प्रोजेक्ट में देरी बिल्डर की वजह से हुई है, तो टैक्सपेयर को टैक्स बेनिफिट से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
मामला क्या था?
यह फैसला एक ऐसे निवेशक से जुड़ा है जिसने जॉइंट डेवलपमेंट एग्रीमेंट के तहत एक रेसिडेंशियल विला प्रोजेक्ट में कैपिटल गेन्स का निवेश किया था। लेकिन, डेवलपर के पार्टनरशिप में आंतरिक विवादों के कारण कंस्ट्रक्शन और पज़ेशन का समय काफी बढ़ गया। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने शुरू में यह कहकर छूट देने से मना कर दिया था कि प्रॉपर्टी का लीगल टाइटल नहीं मिला है और तय समय में कंस्ट्रक्शन पूरा नहीं हुआ है।
कानूनी पहलू और निवेशकों को राहत
इनकम टैक्स एक्ट के तहत सेक्शन 54F का मकसद इंडिविजुअल्स को रेसिडेंशियल हाउसिंग सेक्टर में निवेश के लिए प्रोत्साहित करना है। इसके तहत प्रॉपर्टी या शेयर्स जैसे एसेट्स को बेचकर मिले पैसे को एक तय समय में घर खरीदने में लगाना होता है। कोर्ट के इस फैसले से यह स्थापित होता है कि यदि किसी निवेशक ने वाकई में फंड को घर खरीदने के उद्देश्य से लगाया है, तो बिल्डर की देरी या कानूनी विवाद जैसे बाहरी कारण इस छूट को रद्द नहीं कर सकते। यह उन होम बायर्स के लिए एक मजबूत कानूनी सुरक्षा कवच है जो अक्सर प्रोजेक्ट रुकने पर खुद को असहाय पाते हैं।
आगे क्या?
इस फैसले से उन रियल एस्टेट निवेशकों को बड़ा फायदा होगा जो प्रॉपर्टी में री-इन्वेस्टमेंट के जरिए टैक्स प्लानिंग करते हैं। जिन लोगों के प्रोजेक्ट्स कंस्ट्रक्शन में देरी के कारण अटके हुए हैं, उनके लिए यह एक मिसाल के तौर पर काम करेगा। हालांकि, निवेशकों को सलाह है कि वे अपने सभी पेमेंट्स और एग्रीमेंट्स का रिकॉर्ड सावधानी से रखें। छूट का मुख्य आधार यह साबित करना होगा कि कैपिटल गेन्स को असल में प्रॉपर्टी में लगाया गया था।
