Tata Education and Development Trust (TEDT) के ट्रस्टी मेहली मिस्त्री ने टाटा समूह से जुड़े कानूनी मामलों के लिए ट्रस्ट के फंड के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई है। यह विवाद टाटा संस की संभावित लिस्टिंग और चेयरमैन के कार्यकाल को लेकर मचे घमासान के बीच आया है।
टाटा एजुकेशन एंड डेवलपमेंट ट्रस्ट (TEDT) के ट्रस्टी मेहली मिस्त्री ने समूह की कानूनी लड़ाइयों में ट्रस्ट का पैसा इस्तेमाल करने के खिलाफ बोर्ड को कड़ा पत्र लिखा है। नोएल टाटा सहित बोर्ड के सदस्यों को भेजे गए इस संदेश में मेहली मिस्त्री ने साफ किया है कि जब TEDT की टाटा संस में कोई हिस्सेदारी (Equity) ही नहीं है, तो फिर समूह की कानूनी लड़ाई का बोझ यह ट्रस्ट क्यों उठाए?
अंदरूनी कलह और चुनौतियां
टाटा ग्रुप में यह नया विवाद चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के 5 साल के नए कार्यकाल को लेकर शुरू हुआ है। दिलचस्प बात यह है कि मिस्त्री और नोएल टाटा ने पहले इस विस्तार का समर्थन किया था, लेकिन अब टाटा ट्रस्ट इस फैसले को ही कानूनी चुनौती देने की तैयारी में है।
इसके अलावा, टाटा संस की संभावित लिस्टिंग (IPO) एक बड़ा मुद्दा बनी हुई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के अनुपालन के लिए कंपनी लिस्टिंग पर जोर दे रही है, जबकि नोएल टाटा इसका विरोध कर रहे हैं।
पुराना इतिहास और कानूनी खर्च
विशेषज्ञों को डर है कि यह टकराव समूह के लिए महंगा साबित हो सकता है। पिछली बार साइरस मिस्त्री विवाद के दौरान, टाटा संस और ट्रस्टों ने लगभग ₹200 करोड़ खर्च किए थे, जबकि मिस्त्री खेमे का खर्च करीब ₹50 करोड़ था। अब मेहली मिस्त्री की यह मांग आने वाली बोर्ड बैठक में फंड आवंटन को लेकर स्पष्टता लाने पर मजबूर कर सकती है।
भले ही TCS और Tata Motors जैसी कंपनियां प्रोफेशनल तरीके से काम कर रही हैं, लेकिन प्रमोटर लेवल पर चल रहा यह मतभेद भविष्य की रणनीति और गवर्नेंस पर सवाल खड़े करता है। निवेशकों की नजरें अब टाटा संस की लिस्टिंग और ट्रस्ट के बीच बनने वाली किसी भी सहमति पर टिकी हैं।
