Noel Tata और Neville Tata ने मुंबई की अदालतों में कानूनी कैविएट (Caveats) दायर की है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि Sir Dorabji Tata Trust में उनके पदों को लेकर कोई भी एकतरफा आदेश (ex-parte order) पास न हो। यह कदम ट्रस्ट के भीतर चल रहे गवर्नेंस विवाद के बीच उठाया गया है, जिसका असर Tata Sons के कंट्रोल पर पड़ सकता है।
Sir Dorabji Tata Trust के चेयरमैन Noel Tata और ट्रस्टी Neville Tata ने 7 अक्टूबर को बॉम्बे हाई कोर्ट और मुंबई सिटी सिविल कोर्ट में औपचारिक कैविएट दायर की है। यह कदम एक एहतियाती कानूनी प्रक्रिया है, ताकि कोर्ट उनके पक्ष को सुने बिना उनकी भूमिकाओं को लेकर कोई भी आदेश पारित न करे।
विवाद की जड़ क्या है?
यह कानूनी कदम ट्रस्ट के अन्य ट्रस्टी, जैसे Venu Srinivasan और Vijay Singh द्वारा महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के पास की गई शिकायतों के जवाब में उठाया गया है। ये शिकायतें ट्रस्ट के गवर्नेंस स्ट्रक्चर और परिवार के सदस्यों की भूमिकाओं पर सवाल उठाती हैं।
निवेशकों के लिए क्या है मायने?
टाटा ट्रस्ट्स, Tata Sons के मालिक हैं, जो कि Tata Consultancy Services, Tata Motors और Tata Steel जैसी दिग्गज कंपनियों की होल्डिंग कंपनी है। हालांकि यह विवाद फिलहाल ट्रस्ट के अंदरूनी स्तर पर है, लेकिन बाजार की नजर इस पर बनी हुई है क्योंकि इसका असर भविष्य में टाटा ग्रुप की लीडरशिप और strategic फैसलों, जैसे Tata Sons की संभावित लिस्टिंग, पर पड़ सकता है।
फिलहाल यह मामला महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर की निगरानी में है। रेगुलेटर ने सभी पक्षों को अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया है, जिसकी डेडलाइन 12 अक्टूबर से बढ़ाकर 19 अक्टूबर, 2026 कर दी गई है।
