Tata Trusts vs Mehli Mistry: गवर्नेंस विवाद पर Tata Trusts का पलटवार, आरोपों को बताया बेबुनियाद

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AuthorMehul Desai|Published at:
Tata Trusts vs Mehli Mistry: गवर्नेंस विवाद पर Tata Trusts का पलटवार, आरोपों को बताया बेबुनियाद

Tata Trusts ने पूर्व ट्रस्टी Mehli Mistry की ओर से उठाए गए गवर्नेंस संबंधी सवालों को सिरे से खारिज कर दिया है। ट्रस्ट का कहना है कि ये आरोप प्रशासनिक फाइलिंग के दायरे से बाहर हैं। यह विवाद मुख्य रूप से बोर्ड में बदलाव और रेम्यूनरेशन (remuneration) से जुड़ा है, जिसकी सुनवाई अब 5 नवंबर 2026 को होगी।

विवाद की जड़ और कानूनी दलीलें

Tata Trusts और पूर्व ट्रस्टी Mehli Mistry के बीच का विवाद अब महाराष्ट्र के चैरिटी कमिश्नर तक पहुंच चुका है। Sir Dorabji Tata Trust और Bai Hirabai Jamsetji Tata Navsari Charitable Institution वर्तमान में जरूरी बदलाव रिपोर्ट (change reports) दाखिल करने की प्रक्रिया में हैं। इस पर Tata Trusts ने साफ किया है कि Mistry द्वारा लगाए गए गवर्नेंस मिसकंडक्ट और अनुचित रेम्यूनरेशन के आरोप इन प्रोसीजरल रिपोर्ट्स का हिस्सा नहीं हो सकते। साथ ही, ट्रस्ट ने Mistry के कानूनी अधिकार (locus standi) पर भी सवाल खड़े किए हैं।

क्या हैं Mehli Mistry के आरोप?

बीते साल अक्टूबर में बोर्ड से बाहर होने के बाद, Mistry ने जून में अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं। उनके आरोपों में शामिल है:

  • ट्रस्टियों द्वारा Tata Group की कंपनियों से कथित तौर पर संदिग्ध कमीशन या रेम्यूनरेशन लेना।
  • ग्रुप के कर्मचारियों का निजी कामों में उपयोग करना।
  • अपने निष्कासन को आंतरिक शिकायतों का बदला (retaliatory measure) बताना।

इसके जवाब में Tata Trusts का तर्क है कि जिन ट्रस्टियों (Vijay Singh और Venu Srinivasan) पर सवाल उठाए जा रहे हैं, उनकी पुनर्नियुक्ति में Mistry खुद शामिल थे और उन्होंने तब अपनी सहमति दी थी।

निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?

हालांकि Tata Trusts खुद शेयर बाजार में लिस्टेड नहीं है, लेकिन यह Tata Sons की सबसे बड़ी शेयरहोल्डर है, जो पूरे Tata Group की होल्डिंग कंपनी है। ग्रुप की लिस्टेड कंपनियों में गवर्नेंस और नेतृत्व के फैसलों पर इसका सीधा असर पड़ता है। इसलिए, निवेशक और मार्केट एक्सपर्ट्स इस विवाद पर नजर बनाए हुए हैं ताकि ग्रुप की स्टेबिलिटी और सक्सेशन प्लानिंग पर पड़ने वाले असर को समझा जा सके।

फिलहाल, Sir Ratan Tata Trust एक स्टे ऑर्डर (stay order) के कारण अपना जवाब दाखिल नहीं कर पाया है। वहीं, Noel Tata की नियुक्ति को लेकर भी Mistry की टीम ने सवाल उठाए हैं। अब सबकी निगाहें 5 नवंबर को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां रेगुलेटर इस मामले पर आगे की दिशा तय करेगा।

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