महाराष्ट्र के चैरिटी कमिश्नर अमोघ कलोती अब Tata Trusts के गवर्नेंस विवादों में एक अहम कड़ी बन गए हैं। चूंकि Tata Trusts के पास Tata Group की **66.4%** हिस्सेदारी है, इसलिए निवेशक इस नियामक प्रक्रिया पर बारीकी से नजर रख रहे हैं।
महाराष्ट्र के चैरिटी कमिश्नर अमोघ कलोती की भूमिका Tata Trusts के प्रशासनिक विवादों में काफी महत्वपूर्ण हो गई है। फरवरी 2024 में अपनी नियुक्ति के बाद से ही, कमिश्नर कलोती ट्रस्ट के बोर्ड और कामकाज से जुड़ी कई बड़ी शिकायतों पर निर्णय ले रहे हैं। निवेशकों के लिए यह स्थिति बेहद अहम है क्योंकि यही चैरिटेबल ट्रस्ट Tata Group की 66.4% होल्डिंग को नियंत्रित करते हैं।
कानून और शिकायतों का दायरा
महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट एक्ट, 1950 के तहत कमिश्नर के पास वित्तीय गड़बड़ी की जांच करने और ट्रस्टियों को निलंबित करने तक के अधिकार हैं। वर्तमान में, वे वेणु श्रीनिवासन (Venu Srinivasan) और मेहली मिस्त्री (Mehli Mistry) द्वारा दायर उन शिकायतों की सुनवाई कर रहे हैं, जो ट्रस्ट के बोर्ड कंपोजिशन और गवर्नेंस स्टैंडर्ड्स पर सवाल उठाती हैं।
हालिया बड़ा फैसला
कानूनी प्रक्रिया के बीच, 2 सितंबर 2026 को कमिश्नर कलोती ने एक अहम फैसला सुनाया। उन्होंने साल 1989 के उस शेयर ट्रांसफर को कानूनी रूप से वैध माना, जिसमें नवाजबाई रतन टाटा ट्रस्ट (Navajbai Ratan Tata Trust) और नवल टाटा शामिल थे। इस फैसले ने दशकों पुराने एक विवाद को सुलझाने का काम किया है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट एक्ट के तहत कानूनी कार्यवाही अक्सर लंबी चलती है, क्योंकि इसमें कई स्तरों पर सुनवाई होती है। कमिश्नर कार्यालय कई बार प्राथमिक जांच के लिए डिप्टी कमिश्नर को जिम्मेदारी सौंपता है, जिससे प्रक्रिया में कुछ महीने लग सकते हैं। चूँकि यह मामला Tata Group के भविष्य और उसकी रणनीतिक स्थिरता से जुड़ा है, इसलिए ट्रस्ट की गवर्नेंस में होने वाला कोई भी बदलाव सीधे तौर पर ग्रुप की होल्डिंग कंपनियों को प्रभावित कर सकता है। निवेशकों की नजर अब आगामी सुनवाइयों और बोर्ड कंपोजिशन पर आने वाले प्रशासनिक निर्देशों पर टिकी है।
