Sir Ratan Tata Trust (SRTT) पर लगी वोटिंग पाबंदियों के चलते Tata Sons के शेयरहोल्डिंग गणित में बड़ा बदलाव आया है। इसका सीधा असर कंपनी के बोर्ड रेजोल्यूशन और चेयरमैन की कुर्सी की निरंतरता पर पड़ सकता है।
Tata Sons के अंदरूनी वोटिंग स्ट्रक्चर में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। Sir Ratan Tata Trust (SRTT) के पास कंपनी की 23.56% हिस्सेदारी है, लेकिन फिलहाल इस पर वोटिंग करने की पाबंदी है। इस बदलाव के बाद कंपनी का कुल वोटिंग पूल 404,146 शेयरों से घटकर 308,935 शेयर रह गया है।
गणित में आया बदलाव
इस नए कैलकुलेशन के बाद, Sir Dorabji Tata Trust (SDTT) के पास प्रभावी वोटों का 36.60% हिस्सा आ गया है। यदि अन्य छोटे ट्रस्ट SDTT के साथ मिल जाते हैं, तो यह ब्लॉक कुल 55.37% वोटिंग पावर के साथ किसी भी साधारण प्रस्ताव (Ordinary Resolution) को आसानी से पास करने की स्थिति में आ जाएगा।
N Chandrasekaran और AGM पर असर
यह सारा फेरबदल N Chandrasekaran की चेयरमैनशिप और उनकी पुनर्नियुक्ति जैसे अहम फैसलों के लिए काफी महत्वपूर्ण है। 18 अगस्त को हुई AGM को इसी वजह से स्थगित करना पड़ा था, क्योंकि दोनों मुख्य ट्रस्ट मिलकर जॉइंट रिप्रेजेंटेटिव नियुक्त करने में नाकाम रहे थे।
बाकी स्टेकहोल्डर्स की स्थिति
- Shapoorji Pallonji Group: अब प्रभावी वोटिंग बेस में 24.07% हिस्सेदारी रखता है।
- छोटे ट्रस्ट: JRD Tata Trust, Tata Education Trust और Tata Social Welfare Trust की भूमिका अब और भी अहम हो गई है, जिनके पास कुल 46,350 शेयर हैं।
- लिस्टेड कंपनियां: Tata Motors, Tata Steel और Tata Power जैसी 9 कंपनियों की संयुक्त प्रभावी वोटिंग हिस्सेदारी बढ़कर 16.84% हो गई है।
हालांकि Tata Sons एक अनलिस्टेड होल्डिंग कंपनी है, लेकिन इसके बोर्डरूम के फैसले पूरे Tata Group की दिशा तय करते हैं। निवेशकों की नजरें अब AGM की अगली तारीख और कानूनी जटिलताओं को सुलझाने की प्रक्रिया पर टिकी हैं, क्योंकि यही कंपनी की भविष्य की लीडरशिप तय करेगी।
