तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कर्नाटक पर कावेरी नदी का पानी तय मात्रा से कम देने का आरोप लगाया है। राज्य का कहना है कि कर्नाटक के जलाशयों में पर्याप्त पानी है और उसे सिंचाई व पीने की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए पानी छोड़ना चाहिए।
कावेरी जल विवाद: सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला
तमिलनाडु सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। राज्य ने कर्नाटक पर कावेरी नदी के पानी के बँटवारे को लेकर निर्धारित हिस्सेदारी न देने का आरोप लगाया है। तमिलनाडु का कहना है कि कर्नाटक के ऊपरी इलाकों के जलाशयों में पानी की पर्याप्त उपलब्धता होने के बावजूद, राज्य ज़रूरी मात्रा में पानी नहीं छोड़ रहा है। मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन के निर्देश पर यह कानूनी कदम उठाया गया है, ताकि कर्नाटक, कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (Cauvery Water Management Authority) द्वारा तय किए गए नियमों का पालन करे।
जलाशयों में पानी की स्थिति और कमी
इस विवाद के केंद्र में कर्नाटक के जलाशय हैं, जिनमें कृष्णराजसागर (KRS), काबिनी, हरंगी और हेमावती बांध शामिल हैं। राज्य सरकार द्वारा दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 3 अगस्त तक इन चार प्रमुख जलाशयों में कुल 77.537 TMC पानी जमा था। तमिलनाडु का तर्क है कि इस जल भंडार और कैचमेंट एरिया में हुई हालिया बारिश को देखते हुए, कर्नाटक पानी छोड़ने की स्थिति में है। याचिका में विशेष रूप से बिलिगंडलु गेजिंग स्टेशन पर पहुँचने वाले पानी की मात्रा में अंतर का उल्लेख किया गया है, जहाँ से पानी के बहाव को मापा जाता है।
कानूनी और प्रशासनिक पहलू
तमिलनाडु की याचिका में कहा गया है कि वर्तमान में छोड़ा जा रहा पानी राज्य के हिस्से के अनुपात में कम है। हालांकि कावेरी जल विनियमन समिति (Cauvery Water Regulation Committee) इन प्रवाहों की निगरानी करती है, लेकिन राज्य सरकार का कहना है कि वर्तमान वितरण कार्यक्रम के तहत उसकी कृषि और पीने की ज़रूरतों को पूरा नहीं किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट जाने का मकसद इस कमी को दूर करने के लिए एक स्पष्ट आदेश प्राप्त करना है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब क्षेत्र में पानी के संसाधनों पर दबाव बना हुआ है, जो अक्सर मानसून के महीनों के दौरान और भी बढ़ जाता है।
निवेशकों और इस क्षेत्र से जुड़े हितधारकों के लिए, यह विवाद एक ऐसा मसला है जो तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में कृषि उत्पादकता और औद्योगिक संचालन को प्रभावित कर सकता है। आने वाले दिनों में, सुप्रीम कोर्ट की प्रतिक्रिया और पानी छोड़े जाने की मात्रा को लेकर दिए जाने वाले किसी भी अंतरिम निर्देश पर नज़र रखी जाएगी। कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण से भी भविष्य में अपडेट आ सकते हैं, जब वे अनुपालन स्तरों का आकलन करेंगे और दोनों राज्यों द्वारा प्रस्तुत तर्कों पर विचार करेंगे।
