TMC कार्यकर्ता की पुलिस कस्टडी में मौत: परिवार ने लगाया टॉर्चर का आरोप

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
TMC कार्यकर्ता की पुलिस कस्टडी में मौत: परिवार ने लगाया टॉर्चर का आरोप

पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में 8 अगस्त, 2026 को पुलिस कस्टडी में एक तृणमूल कांग्रेस (TMC) कार्यकर्ता, बीरजू केओट, की मौत हो गई। पुलिस सूत्रों का कहना है कि मौत का कारण प्राकृतिक हो सकता है, लेकिन परिवार ने हिरासत में टॉर्चर का आरोप लगाया है। इस घटना ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है और मौत के कारणों की स्वतंत्र जांच की मांग की जा रही है।

पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में हालीशहर पुलिस स्टेशन में 8 अगस्त, 2026 की सुबह एक तृणमूल कांग्रेस (TMC) कार्यकर्ता, जो एक पूर्व पार्षद के पति भी थे, पुलिस कस्टडी में चल बसे। यह घटना शुक्रवार को उनकी गिरफ्तारी के कुछ ही समय बाद हुई। उन पर एक्सटॉर्शन (जबरन वसूली) और भ्रष्टाचार के आरोप थे, और स्थानीय अदालत ने जांच के लिए पुलिस को पांच दिन की कस्टडी दी थी।

उनकी मौत की खबर सामने आने के बाद, परिवार ने हिरासत में उनकी स्थिति को लेकर गंभीर चिंता जताई है। बीरजू केओट की पत्नी, जेनी शर्मा केओट, का आरोप है कि लॉक-अप में उनके पति को बेरहमी से शारीरिक टॉर्चर किया गया। उन्होंने बताया कि शुक्रवार शाम को जब उन्होंने उनसे मुलाकात की थी तब वे स्वस्थ दिख रहे थे। पत्नी का दावा है कि मौत की खबर मिलने पर उन्होंने चोट के निशान देखे। वहीं, पुलिस सूत्रों का कहना है कि मौत का मुख्य कारण हार्ट अटैक हो सकता है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, जिससे मौत के कारणों का पता चलने की उम्मीद है।

इस घटना ने पश्चिम बंगाल में राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने घटना की कड़ी निंदा की है। पार्टी के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने सार्वजनिक रूप से पुलिस कार्रवाई और कस्टडी के दौरान कानूनी प्रक्रियाओं के पालन पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (BJP) सहित अन्य दलों ने भी इस मामले की पारदर्शी और गहन जांच की मांग की है, और क्षेत्र में कानून प्रवर्तन प्रथाओं पर चिंता जताई है।

यह घटना कस्टडी की जिम्मेदारी और संस्थागत पारदर्शिता के व्यापक मुद्दे पर ध्यान आकर्षित करती है। ऐसे मामलों पर बारीकी से नजर रखी जाती है क्योंकि ये स्थानीय कानून व्यवस्था को बाधित कर सकते हैं, जिसका अप्रत्यक्ष प्रभाव क्षेत्रीय स्थिरता और जन भावना पर पड़ सकता है। संवेदनशील राजनीतिक माहौल में, जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए ऐसे मामलों को संभालना महत्वपूर्ण है।

सभी संबंधित पक्षों के लिए सबसे महत्वपूर्ण मॉनिटर करने वाली बात पोस्टमार्टम रिपोर्ट के निष्कर्ष होंगे। इससे यह तय करने में मदद मिलेगी कि मौत प्राकृतिक चिकित्सा कारणों से हुई या बाहरी कारकों से। इसके अलावा, हिरासत में दुराचार के आरोपों को संबोधित करने के लिए राज्य अधिकारियों या न्यायिक निकायों द्वारा शुरू की गई किसी भी आधिकारिक जांच पर भी नजर रखी जाएगी। इस मामले के समाधान में आधिकारिक जांच और किसी भी संभावित प्रशासनिक कार्रवाई से संबंधित भविष्य के अपडेट महत्वपूर्ण होंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.