TMC (All India Trinamool Congress) ने ऐलान किया है कि वह अगले 7 से 10 दिनों के अंदर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी। पार्टी 20 बागी लोकसभा सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग कर रही है, जिन्होंने हाल ही में नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) का दामन थामा है।
TMC का बड़ा कदम
ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने साफ कर दिया है कि वे अगले 7 से 10 दिनों में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर करेंगे। इस याचिका का मुख्य उद्देश्य 20 लोकसभा सांसदों की सदस्यता रद्द करवाना है। इन सांसदों ने हाल ही में पार्टी छोड़कर नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल हो गए थे।
स्पीकर की कार्रवाई पर सवाल?
पार्टी नेतृत्व का आरोप है कि लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने जून 2026 में TMC द्वारा दायर की गई अयोग्यता याचिकाओं पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है। इसी निष्क्रियता के चलते TMC अब सीधे सुप्रीम कोर्ट का रुख कर रही है।
दल-बदल कानून का पेच
यह पूरा मामला भारतीय संविधान की 10वीं अनुसूची में वर्णित दल-बदल कानून (Anti-defection law) की व्याख्या पर टिका है। इस कानून के तहत, यदि कोई सांसद बिना किसी मान्यता प्राप्त विलय या विभाजन के अपनी पार्टी छोड़ता है, तो उसे अयोग्य घोषित किया जा सकता है। हालांकि, 20 बागी सांसद दावा कर रहे हैं कि उन्होंने NCPI के साथ विलय के लिए पर्याप्त समर्थन जुटा लिया है। लेकिन TMC का नेतृत्व, जिसमें जनरल सेक्रेटरी अभिषेक बनर्जी भी शामिल हैं, इस दावे को खारिज करता है और कहता है कि यह दलबदल पार्टी अनुशासन का उल्लंघन है।
आगे क्या?
राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम से विधायी अस्थिरता का अंदेशा है। पार्टी दलबदल के मामलों में अदालती लड़ाई से सीटों की स्थिति को लेकर अनिश्चितता बढ़ सकती है और नीति-निर्माण से ध्यान हट सकता है। अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं कि वह दल-बदल कानून की व्याख्या कैसे करती है। इस कानूनी लड़ाई का नतीजा भविष्य में लोकसभा में पार्टी विवादों को संभालने के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल कायम कर सकता है।
