Election Commission केस: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टली, अब नवंबर के बीच में होगी अहम चर्चा

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Election Commission केस: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टली, अब नवंबर के बीच में होगी अहम चर्चा

सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्शन कमीशन की वोटर लिस्ट रिवीजन प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए नवंबर के मध्य का समय तय किया है। विवाद **13 करोड़** मतदाताओं के कथित नाम हटाने से जुड़ा है, जिस पर कोर्ट अब बारीकी से जांच करेगा।

सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसकी अध्यक्षता जस्टिस सूर्यकांत कर रहे हैं, ने इलेक्शन कमीशन को हालिया वोटर रोल अपडेट्स की पारदर्शिता पर उठे सवालों का जवाब देने के लिए अतिरिक्त समय दिया है। यह पूरा मामला तब सुर्खियों में आया जब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम लिस्ट से गायब होने के गंभीर आरोप लगे।

कानूनी दांव-पेच

याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने मांग की है कि आयोग को अपने इंटरनल रिकॉर्ड्स और फैसले लेने की प्रक्रिया के दस्तावेजों को सार्वजनिक करना चाहिए। वहीं, चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार की अगुवाई में आयोग का कहना है कि उनकी हर कार्रवाई मौजूदा कानूनी नियमों के दायरे में है। आयोग ने पारदर्शिता के नाम पर इंटरनल रिकॉर्ड्स देने से इनकार करते हुए इसे संस्थागत स्वायत्तता की रक्षा बताया है।

क्या है विवाद की जड़?

तृणमूल कांग्रेस की नेता डोला सेन द्वारा दायर इस याचिका में 'फॉर्म 6' (Form 6) से जुड़ी प्रक्रिया में कथित हेरफेर का मुद्दा उठाया गया है। आरोप है कि आयोग ने वेरिफिकेशन के नाम पर ऐसी अतिरिक्त शर्तें जोड़ी हैं, जो कानूनी प्रक्रिया को प्रभावित करती हैं। हालांकि, आयोग का स्पष्टीकरण है कि ये कदम केवल सुरक्षा और वेरिफिकेशन के लिए उठाए गए थे।

बाजार पर असर

भले ही यह एक संवैधानिक मामला है, लेकिन निवेशक और बाजार के जानकार इस पर बारीक नजर रखे हुए हैं। संस्थागत और रेगुलेटरी स्थिरता किसी भी देश के फाइनेंशियल मार्केट के लिए बेहद जरूरी होती है। कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनवाई से पहले अपने सप्लीमेंट्री एफिडेविट फाइल करने की छूट दी है, जिससे अब नवंबर में होने वाली सुनवाई निवेशकों के लिए एक बड़ा 'मॉनिटरेबल' इवेंट बन गई है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.