Supreme Court ने NHAI की उस याचिका पर सुनवाई के लिए स्पेशल बेंच बनाने का फैसला किया है, जिसमें देश भर में मवेशियों के लिए शेल्टर बनाने के निर्देश को चुनौती दी गई है। इस प्रोजेक्ट पर अनुमानित खर्च **₹7,000 करोड़** बताया जा रहा है, जिससे सड़क निर्माण बजट और प्रोजेक्ट की टाइमलाइन पर असर पड़ सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) की याचिका पर सुनवाई के लिए एक विशेष बेंच का गठन करने पर सहमति जता दी है। यह मामला देश भर में आवारा मवेशियों के लिए शेल्टर बनाने के एक पुराने न्यायिक निर्देश से जुड़ा है। NHAI ने अपनी कानूनी दलीलों में साफ किया है कि उसका मुख्य कार्य हाईवे का विकास करना है, न कि मवेशियों के लिए आश्रय स्थल बनाना।\n\n### इंफ्रास्ट्रक्चर फंडिंग पर क्या होगा असर?\n\nसुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को बताया कि इस प्रोजेक्ट को लागू करने में लगभग ₹7,000 करोड़ का खर्च आएगा। NHAI का तर्क है कि उनके पास ऐसे कल्याणकारी कार्यों के लिए न तो प्रशासनिक ढांचा है और न ही विशेषज्ञता। अथॉरिटी का यह भी कहना है कि यह जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की होनी चाहिए।\n\nनिवेशकों और इंफ्रा सेक्टर की कंपनियों के लिए यह मामला काफी गंभीर है। यदि NHAI को अपने बजट का एक बड़ा हिस्सा गैर-जरूरी कल्याणकारी कार्यों में डायवर्ट करना पड़ा, तो इसका सीधा असर सड़क निर्माण के लिए आवंटित पूंजी पर पड़ेगा। इससे प्रोजेक्ट्स की गति धीमी हो सकती है, पेमेंट साइकिल में देरी हो सकती है और नए टेंडर्स आने की रफ्तार भी प्रभावित हो सकती है।\n\n### सेक्टर के लिए संकेत\n\nयह कोर्ट का फैसला भविष्य के लिए एक मिसाल बनेगा कि क्या पब्लिक वेलफेयर को इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के साथ मिलाया जाना चाहिए। अगर अदालत NHAI को ही यह जिम्मेदारी सौंपती है, तो अथॉरिटी को अपनी मौजूदा योजनाओं में फेरबदल करना पड़ सकता है। सड़क निर्माण के क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों की नजर अब इस केस की अगली सुनवाई पर है, क्योंकि इसी से तय होगा कि देश में हाईवे निर्माण की रफ्तार पर कोई ब्रेक लगेगा या नहीं।
