लखीमपुर खीरी हिंसा मामले के मुख्य आरोपी Ashish Mishra की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 26 अक्टूबर को सुनवाई करेगा। अदालत इस पूरे ट्रायल पर बारीकी से नजर रखे हुए है, जिसमें अब तक **130** में से **86** गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं।
कोर्ट की निगरानी में ट्रायल
साल 2021 की लखीमपुर खीरी हिंसा मामले की सुनवाई अब अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है। जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की स्पेशल बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी। इस केस में आशीष मिश्रा समेत 13 आरोपी शामिल हैं, जिन पर हत्या और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर आरोप हैं।
क्या है विवाद की जड़?
ट्रायल के दौरान कई बार प्रक्रियात्मक अड़चनें सामने आई हैं, जिसके चलते सुप्रीम कोर्ट लगातार इसकी निगरानी कर रहा है। हाल ही में, कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार (विजिलेंस) को ट्रायल जज के कामकाज पर एक 'सीलबंद रिपोर्ट' जमा करने का निर्देश दिया था। यह फैसला तब आया जब पीड़ित पक्ष के वकीलों ने कुछ मामलों के ट्रांसफर और फैसलों पर गंभीर सवाल उठाए थे।
बचाव पक्ष की दलीलें
आशीष मिश्रा के वकील सिद्धार्थ दवे का तर्क है कि कोर्ट के अधिकारियों के खिलाफ बार-बार उठाए जा रहे सवाल ट्रायल को बाधित करने की कोशिश हैं। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने इन आरोपों पर कोई भी राय बनाने से इनकार कर दिया है और वे विजिलेंस रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। आने वाली 26 अक्टूबर की तारीख इस मामले में प्रशासनिक जवाबदेही और ट्रायल की गति के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है।
