सुप्रीम कोर्ट ने डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ पर हमला करने वाले राजनीतिक लोगों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि ऐसे लोगों को बेल नहीं मिलनी चाहिए और उन्हें हिरासत में ही रहना चाहिए।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने डॉक्टरों की सुरक्षा पर गंभीर चिंता जताई है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि मेडिकल स्टाफ पर हमला कानून का खुला उल्लंघन है और ऐसे अपराधों में शामिल लोगों को जमानत जैसी राहत नहीं मिलनी चाहिए। कोर्ट का मानना है कि डॉक्टरों को बिना किसी डर के काम करने का माहौल मिलना चाहिए, जिसके लिए कानूनी तौर पर सख्त निवारक (Deterrents) जरूरी हैं।
मामला क्या है?
यह सुनवाई शिवसेना के कॉर्पोरेटर रमेश म्हात्रे की याचिका पर हो रही थी। म्हात्रे पर जुलाई 2026 में ठाणे के शास्त्री नगर अस्पताल में डॉक्टरों के साथ मारपीट करने का आरोप है। यह पूरा विवाद अस्पताल के नियोनेटल यूनिट में बेड की उपलब्धता को लेकर शुरू हुआ था। इससे पहले बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी इस घटना को लोकतंत्र और नागरिक मानकों के लिए बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया था।
आगे की कानूनी प्रक्रिया
सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता के वकील मुकुल रोहतगी ने कोर्ट का रुख देखते हुए अपनी याचिका वापस ले ली है। इससे अब महाराष्ट्र सरकार द्वारा रमेश म्हात्रे की जमानत रद्द करने के लिए दायर की गई अलग अपील का रास्ता साफ हो गया है। कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई 28 सितंबर 2026 के लिए तय की है।
