सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग (ECI) को साल 2023 के Sringeri निर्वाचन क्षेत्र की मतगणना की गायब वीडियो फुटेज पेश करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने इसके लिए **15 फरवरी, 2027** की समय-सीमा तय की है और स्पष्ट किया है कि आदेश न मानने पर गंभीर कानूनी परिणाम भुगतने होंगे।
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने चुनाव आयोग के कामकाज पर कड़ी टिप्पणी करते हुए एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच ने साल 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान Sringeri सीट की मतगणना की वीडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध न करा पाने पर नाराजगी जताई है।\n\n### कोर्ट का अल्टीमेटम\nन्यायालय ने चुनाव आयोग को चेतावनी दी है कि यदि अगली सुनवाई यानी 15 फरवरी, 2027 तक ये दस्तावेज पेश नहीं किए गए, तो कोर्ट मामले में विपरीत कानूनी निष्कर्ष निकाल सकता है। यह निर्देश चुनावी पारदर्शिता और संस्थागत जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।\n\n### क्या है पूरा विवाद?\nयह मामला Sringeri में हुई वोटों की गिनती से जुड़ा है। शुरुआत में कांग्रेस प्रत्याशी TD Rajegowda को विजेता घोषित किया गया था, लेकिन कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश पर हुए री-वेरिफिकेशन के बाद 3 मई, 2026 को बीजेपी के DN Jeevaraj को विजेता घोषित कर दिया गया।\n\n### क्या हैं आरोप?\nTD Rajegowda का आरोप है कि रिटर्निंग ऑफिसर ने हाईकोर्ट के मूल आदेश से बाहर जाकर काम किया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि सिर्फ 279 रिजेक्ट किए गए पोस्टल बैलेट्स की दोबारा जांच होनी थी, लेकिन अधिकारियों ने उन 562 वोटों को भी दोबारा चेक कर लिया जो पहले ही वैध माने जा चुके थे। इन आरोपों की सच्चाई जानने के लिए ही वह वीडियो फुटेज और ऑब्जर्वर की रिपोर्ट्स महत्वपूर्ण साक्ष्य हैं। फिलहाल, कोर्ट ने TD Rajegowda को अंतरिम राहत देते हुए उन्हें अपना पद संभालने की अनुमति दी है।
