देश की सबसे बड़ी अदालत, Supreme Court अगले हफ्ते Election Commission की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुनवाई करने जा रही है। इस मामले में कमिश्नरों के बीच **14** बार असहमति की खबरें सामने आई हैं।
सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी। याचिकाकर्ता का मुख्य तर्क यह है कि क्या चुनाव आयोग अपने संवैधानिक नियमों और आंतरिक प्रोटोकॉल का पालन कर रहा है। चुनौती यह दी गई है कि क्या महत्वपूर्ण फैसलों में बहु-सदस्यीय आयोग का सामूहिक निर्णय शामिल है या नहीं।
असहमति का विवाद
विवाद का केंद्र पिछले 10 महीनों में इलेक्शन कमिश्नर सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी द्वारा दर्ज की गई 14 अलग-अलग असहमति की घटनाएं हैं। आरोप है कि 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) जैसे प्रशासनिक कदम बिना पूर्ण आयोग की सिफारिश या व्यापक विचार-विमर्श के उठाए गए थे।
आयोग का पक्ष
इन आरोपों पर चुनाव आयोग ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि ये असहमति केवल डेपुटेशन पर आए एक अधिकारी से जुड़े व्यक्तिगत मामलों तक सीमित थी। आयोग ने स्पष्ट किया कि इसे नीतिगत या प्रशासनिक फैसलों को चुनौती के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। हालांकि, अब न्यायिक जांच ही यह तय करेगी कि आयोग के कामकाज में पारदर्शिता के मानक कितने खरे उतरते हैं।
