Supreme Court ने आंध्र प्रदेश के 100 शहरी स्थानीय निकायों (Urban Local Bodies) में चुनाव प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। YSR Congress Party द्वारा उम्मीदवारों को डराने-धमकाने के आरोपों के बाद यह कदम उठाया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश की 13 नगर निगमों और 87 नगरपालिकाओं में चुनाव प्रक्रिया को फिलहाल रोक दिया है। यह आदेश YSR Congress Party द्वारा दायर उस याचिका के बाद आया है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि पुंगनूर, रायचोटी, कडप्पा और तिरुपति जैसे क्षेत्रों में उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोका गया था। इसके चलते राज्य चुनाव आयोग ने 14 अक्टूबर को जारी अधिसूचना के बाद की सभी कार्यवाही को स्थगित कर दिया है।
प्रशासनिक कार्यों पर प्रभाव
इस स्थगन से राज्य के स्थानीय प्रशासन में अनिश्चितता का माहौल बन गया है। चूंकि शहरी निकाय पानी की आपूर्ति, कचरा प्रबंधन और सड़क रखरखाव जैसी बुनियादी नागरिक परियोजनाओं के लिए जिम्मेदार होते हैं, इसलिए इस अचानक आई रुकावट से नए म्यूनिसिपल कॉन्ट्रैक्ट्स और टेंडर प्रक्रिया में देरी होना तय माना जा रहा है। आमतौर पर चुनावी प्रक्रिया के दौरान नीतिगत निर्णय धीमे हो जाते हैं, और इस नए आदेश ने इस निष्क्रियता की अवधि को और बढ़ा दिया है।
आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने 25 अक्टूबर तक अंतिम उम्मीदवार सूची जारी न करने का निर्देश दिया है। इस दौरान चुनाव आयोग को जिले की रिपोर्टों और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की जांच करनी होगी। राज्य चुनाव आयुक्त अनिल चंद्र पुनेठा 22 अक्टूबर को नामांकन की समयसीमा बढ़ाने पर निर्णय ले सकते हैं। यदि समयसीमा बढ़ती है, तो उम्मीदवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कम से कम 48 घंटे का बफर समय देना अनिवार्य होगा। फिलहाल मार्केट के जानकारों की नजर आयोग के अगले फैसलों पर है, क्योंकि इन्हीं से विकास परियोजनाओं की गति तय होगी।
