Supreme Court का ऐतिहासिक फैसला: राज्यों के सेल्स टैक्स विवाद पर पूर्ण विराम

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Supreme Court का ऐतिहासिक फैसला: राज्यों के सेल्स टैक्स विवाद पर पूर्ण विराम

Supreme Court ने **27 साल** पुराने सेल्स टैक्स सरचार्ज विवाद को GST आने के बाद अब निष्प्रभावी घोषित कर दिया है। यह फैसला **1974** के पुराने कानून की पुष्टि करता है, जिससे प्री-GST टैक्स विवादों का रास्ता साफ हो गया है।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय की 7 जजों वाली संविधान पीठ ने सेल्स टैक्स पर सरचार्ज लगाने के राज्य सरकारों के अधिकार को लेकर चल रहे 27 साल पुराने कानूनी पेच को सुलझा दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि 2017 में GST लागू होने के बाद अब यह पूरा मामला केवल 'एकेडमिक' रह गया है।

क्या था मुख्य मामला?

यह विवाद 'अर्जुन फ्लोर मिल्स बनाम ओडिशा सरकार' मामले से शुरू हुआ था। कोर्ट ने 1974 के 'एस. कोडार बनाम केरल सरकार' के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि राज्य विधानसभाओं के पास सेल्स टैक्स पर सरचार्ज लगाने का संवैधानिक अधिकार है। कोर्ट ने साफ किया कि सरचार्ज को सेल्स टैक्स की दर में बढ़ोतरी माना जाएगा, न कि डीलर की आय पर टैक्स। इस कारण यह राज्य के विधायी अधिकार क्षेत्र में आता है।

निवेशकों और कॉर्पोरेट्स के लिए क्या हैं मायने?

यह फैसला कॉरपोरेट गवर्नेंस के नजरिए से काफी अहम है। GST आने से पहले कई कंपनियां पुराने टैक्स विवादों, नोटिस और मुकदमेबाजी में फंसी थीं। कोर्ट के इस फैसले ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि पुराने कानूनी विवाद अब खत्म हो गए हैं।

कंपनियां अक्सर अनिश्चितता के कारण 'कंटिंजेंट लायबिलिटी' (Contingent Liability) के तौर पर फंड अलग रखती थीं। अब इस फैसले के बाद कंपनियों को अपनी पुरानी टैक्स स्थितियों को बेहतर ढंग से समझने और अनिश्चितता के बोझ को कम करने में मदद मिलेगी। ध्यान रहे कि यह फैसला वर्तमान GST व्यवस्था को नहीं बदलता, बल्कि पुरानी कर प्रणाली के विवादों का कानूनी अध्याय बंद करता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.