Aravalli Range Report: सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख, माइनिंग और इंफ्रा प्रोजेक्ट्स के लिए तय की डेडलाइन

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Aravalli Range Report: सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख, माइनिंग और इंफ्रा प्रोजेक्ट्स के लिए तय की डेडलाइन

सुप्रीम कोर्ट ने अरावली रेंज की परिभाषा तय करने वाली रिपोर्ट के लिए समय बढ़ाने की मांग को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने **30 नवंबर, 2026** तक फाइनल रिपोर्ट जमा करने का सख्त निर्देश दिया है, जो राजस्थान, हरियाणा और गुजरात के माइनिंग सेक्टर के लिए बेहद अहम है।

कोर्ट ने क्यों नकारा एक्सटेंशन?

जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने अरावली हिल्स के सीमांकन (Demarcation) पर काम कर रही कमेटी को और समय देने से साफ इनकार कर दिया है। कमेटी ने फरवरी 2027 तक का समय मांगा था, लेकिन कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए साफ कहा कि पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील इस क्षेत्र का वैज्ञानिक आकलन बिना किसी देरी के पूरा होना चाहिए। इस कमेटी का नेतृत्व भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद की कंचन देवी कर रही हैं।

माइनिंग और इंफ्रा सेक्टर पर असर

यह फैसला उन कंपनियों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है जो राजस्थान, हरियाणा और गुजरात में माइनिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स चला रही हैं। साल 2002 से अरावली क्षेत्र में माइनिंग पर सख्त न्यायिक प्रतिबंध लागू हैं, जिससे नई लीज और रिन्यूअल प्रक्रिया अटकी हुई है। अरावली की सटीक परिभाषा न होने के कारण कई औद्योगिक प्रोजेक्ट्स में बाधाएं आ रही थीं। अब इस रिपोर्ट के जरिए यह साफ होगा कि किन इलाकों में खनन और विकास कार्यों को हरी झंडी मिल सकती है।

निवेशकों के लिए अगला कदम

अब निवेशकों की नजर 2 दिसंबर, 2026 को होने वाली सुनवाई पर है। जब यह रिपोर्ट आएगी, तो वही तय करेगी कि किस क्षेत्र को 'इकोलॉजिकल सेंसिटिव जोन' माना जाएगा और कहां आर्थिक गतिविधियां बढ़ाई जा सकती हैं। तब तक, इन राज्यों में काम करने वाली माइनिंग और सीमेंट कंपनियों के लिए रेगुलेटरी अनिश्चितता बरकरार रहेगी, और आने वाले समय में कंपनियों को अधिक सख्त एनवायरनमेंटल इम्पैक्ट असेसमेंट (EIA) का पालन करना पड़ सकता है।

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