सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में सुधार के लिए **3 हफ्ते** का समय दिया है। कोर्ट ने कहा है कि NEET-UG जैसी परीक्षाओं की पवित्रता बनाए रखने के लिए राधाकृष्णन और नीलकणि समितियों की सिफारिशों को लागू किया जाए।
NTA में सुधारों के लिए सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में बड़े सुधारों के लिए 3 हफ़्ते के अंदर एक विस्तृत एक्शन प्लान पेश करने का आदेश दिया है। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और आलोक आर्ध की बेंच ने इस बात पर जोर दिया कि NTA को एक भरोसेमंद संस्था के तौर पर काम करने के लिए स्ट्रक्चरल बदलावों की ज़रूरत है, ताकि परीक्षाओं में धांधली को रोका जा सके।
राधाकृष्णन और नीलकणि समितियों की भूमिका
कोर्ट का पूरा ध्यान उन सिस्टमिक बदलावों को लागू करने पर है, जिन्हें सात-सदस्यीय राधाकृष्णन कमेटी और इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलकणि की अगुवाई वाली हाई-पावर्ड टास्क फोर्स ने सुझाया है। इन समितियों को डेटा सिक्योरिटी, परीक्षा प्रक्रिया को बेहतर बनाने और NTA के पुनर्गठन के तरीकों पर सुझाव देने का काम सौंपा गया था। बेंच ने कहा कि अक्सर सरकार सुरक्षा उपायों की लिस्ट तो बताती है, लेकिन एजेंसी में UPSC जैसी स्थापित संस्थाओं जैसी गहरी, स्थायी संरचना और संस्थागत स्मृति (institutional memory) का अभाव है।
क्या है मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था?
सुनवाई के दौरान, सॉलिसिटर जनरल ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि मौजूदा प्रोटोकॉल काफी मजबूत हैं। इनमें प्रश्न पत्रों की छपाई और वितरण के दौरान कई जांचें, लगातार CCTV निगरानी, पुलिस एस्कॉर्ट और सुरक्षित बैंक वॉल्ट में स्टोरेज शामिल हैं। हालांकि, कोर्ट का मानना था कि ये उपाय ऊपरी तौर पर मदद करते हैं, लेकिन एजेंसी के गहरे संस्थागत सुधार की ज़रूरत को पूरा नहीं करते। बेंच ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि एडवांस्ड डेटा सिक्योरिटी जैसी टेक्नोलॉजी को NTA के मुख्य ऑपरेशंस में गहराई से एकीकृत किया जाना चाहिए।
शिक्षा जगत पर असर
यह फैसला भारतीय उच्च शिक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षाओं की विश्वसनीयता ही इस सेक्टर की रीढ़ है, जिसका सीधा असर कोचिंग सेंटरों, एडटेक प्लेटफॉर्मों और शैक्षणिक संस्थानों पर पड़ता है। परीक्षाओं की इंटीग्रिटी को लेकर लगातार होने वाले विवाद पॉलिसी में अनिश्चितता पैदा करते हैं, जो शिक्षा से जुड़े व्यवसायों और छात्रों के भविष्य को बाधित कर सकते हैं। एक मजबूत, टेक्नोलॉजी-संचालित और स्वायत्त NTA की ओर बढ़कर, न्यायपालिका यह संकेत दे रही है कि वह परीक्षा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्थायी, सिस्टमिक समाधान की उम्मीद करती है।
आगे क्या?
अब सभी की निगाहें सरकार के उस एफिडेविट पर होंगी, जो 3 हफ़्ते में पेश किया जाना है। इसमें उम्मीद है कि राधाकृष्णन और नीलकणि पैनल की सिफारिशों को कैसे लागू किया जाएगा, इसका विवरण होगा। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि वह इन सुधारों की गुणवत्ता और समय-सीमा की बारीकी से निगरानी करेगा।
