सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग (Election Commission of India) को 'Form 6' में किए गए बदलावों से जुड़े आंतरिक रिकॉर्ड पेश करने का निर्देश दिया है। कोर्ट यह जांच रहा है कि क्या ये बदलाव सर्वसम्मति से हुए थे या एकतरफा लिए गए फैसले थे।
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग (Election Commission of India) के प्रशासनिक कामकाज में दखल देते हुए 'Form 6' में हुए बदलावों को लेकर जवाब मांगा है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाला बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय बेंच इन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है, जिनमें वोटर रजिस्ट्रेशन प्रक्रियाओं की वैधता को चुनौती दी गई है।
मामले की जड़ क्या है?
अदालत के सामने मुख्य सवाल यह है कि क्या ECI के हालिया प्रशासनिक फैसले सर्वसम्मति (Consensus) पर आधारित थे। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि 'Form 6' और 'Special Intensive Revision' (SIR) से जुड़ी नीतियां अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लागू की गईं। कोर्ट अब इन दस्तावेजों की जांच कर यह तय करेगा कि क्या मुख्य चुनाव आयुक्त ने संवैधानिक नियमों का पालन किया है या नहीं।
चुनाव आयोग का पक्ष
चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उनके सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे। आयोग ने 27 मई, 2026 के सुप्रीम कोर्ट के उस पुराने आदेश का हवाला दिया, जिसमें वोटर रजिस्ट्रेशन के दौरान डिक्लेरेशन फॉर्म मांगने के अधिकार को सही ठहराया गया था। फिलहाल, आयोग ने उन राज्यों में बिना अतिरिक्त डिक्लेरेशन के 'Form 6' स्वीकार करना शुरू कर दिया है, जो अभी SIR प्रक्रिया के दायरे में नहीं हैं।
बाजार पर असर
यह मामला पूरी तरह से संवैधानिक और प्रशासनिक है। इसका किसी लिस्टेड कंपनी या शेयर बाजार (Stock Market) पर कोई असर नहीं है। निवेशकों और आम लोगों के लिए देखने वाली बात यह होगी कि जब आयोग अपने रिकॉर्ड कोर्ट में पेश करेगा, तो डिजिटल फॉर्म को लेकर क्या फैसला आता है। यह भविष्य की वोटर रजिस्ट्रेशन नीतियों की दिशा तय करेगा।
