सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से 'टोटलाइजर मशीन' के इस्तेमाल में आ रही बाधाओं पर सफाई मांगी है। यह तकनीक वोटिंग प्राइवेसी को सुरक्षित रखने के लिए कई बूथों के वोटों को एक साथ मिलाने का काम करती है।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को यह बताने का निर्देश दिया है कि आखिर किन तकनीकी या नीतिगत कारणों से अब तक 'टोटलाइजर मशीनों' को नहीं अपनाया गया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस मामले में सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है।
यह तकनीक कैसे काम करेगी?
टोटलाइजर मशीनों का मुख्य उद्देश्य लगभग 14 मतदान केंद्रों के वोटों को एक साथ मिलाना है। इससे यह पता नहीं चल पाएगा कि किस विशेष इलाके ने किस पार्टी को वोट दिया है। जानकारों का मानना है कि इससे चुनाव के बाद होने वाली राजनीतिक रंजिश और क्षेत्र-आधारित भेदभाव को कम किया जा सकता है। इन मशीनों को बनाने वाली मुख्य कंपनियां सरकारी क्षेत्र की Bharat Electronics Limited (BEL) और Electronics Corporation of India Limited (ECIL) हैं, जो पहले से ही EVM की निर्माता हैं।
बड़ी कानूनी और प्रशासनिक चुनौतियां
हालांकि यह सुनने में एक तकनीकी सुधार लगता है, लेकिन इसमें कई कानूनी पेंच भी हैं। चुनाव आयोग (ECI) ने पहले यह तर्क दिया था कि मौजूदा 'फॉर्म 17C' के जरिए हर बूथ का रिजल्ट देखा जाता है, जो चुनाव की पारदर्शिता के लिए एक महत्वपूर्ण ऑडिट ट्रेल है। टोटलइजर सिस्टम लागू करने के लिए सरकार को 'कंडक्ट ऑफ इलेक्शन रूल्स' में बड़े बदलाव करने होंगे।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
निवेशकों के नजरिए से यह खबर सीधे किसी वित्तीय उछाल से नहीं, बल्कि भविष्य की सरकारी पॉलिसी से जुड़ी है। यदि सरकार इस दिशा में आगे बढ़ती है, तो BEL और ECIL को नए ऑर्डर्स मिल सकते हैं। फिलहाल बाजार की नजरें केंद्र सरकार के उस हलफनामे पर हैं जो वह सुप्रीम कोर्ट में पेश करेगी।
