Liquor Industry: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा रुख, शराब की पैकेजिंग और उम्र के वेरिफिकेशन पर सरकार से मांगा जवाब

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Liquor Industry: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा रुख, शराब की पैकेजिंग और उम्र के वेरिफिकेशन पर सरकार से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को शराब की पैकेजिंग और अनिवार्य एज-वेरिफिकेशन (age-verification) पर चार हफ्ते में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। यह कदम भारतीय शराब उद्योग के लिए नए नियमों की आहट हो सकता है।

भारतीय शराब उद्योग पर रेगुलेटरी नियमों का शिकंजा कसता दिख रहा है। सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच, जिसकी अध्यक्षता जस्टिस विक्रम नाथ कर रहे हैं, ने केंद्र और राज्य सरकारों से शराब की पैकेजिंग और बिक्री के दौरान उम्र के वेरिफिकेशन पर उनकी राय मांगी है।

पैकेजिंग पर विवाद

यह मामला 'कम्युनिटी अगेंस्ट ड्रंकन ड्राइविंग' (CADD) नामक एनजीओ की याचिका पर शुरू हुआ है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि शराब को जूस के कार्टन या पाउच जैसे दिखने वाले पैकेट्स में बेचा जा रहा है, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा होती है और गलती से या कम उम्र के युवाओं द्वारा इनके सेवन का खतरा बढ़ जाता है।

इंडस्ट्री की दलील

दूसरी ओर, 'एक्शन एलायंस फॉर रीसाइक्लिंग बेवरेज कार्टन्स' ने अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि देश में सालाना 10 बिलियन शराब के कार्टन बिकते हैं। इंडस्ट्री का तर्क है कि अचानक पैकेजिंग बदलने से सप्लाई चेन में भारी व्यवधान आएगा और कंपनियों की लागत में बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

उम्र की जांच का नया नियम

अदालत अब देश भर में शराब की बिक्री के लिए एक स्टैंडर्ड एज-वेरिफिकेशन सिस्टम लागू करने की संभावना तलाश रही है। अगर भविष्य में सरकार अनिवार्य डिजिटल वेरिफिकेशन या सख्त गाइडलाइंस लाती है, तो रिटेल स्टोर्स और होम डिलीवरी सर्विसेज के लिए अनुपालन (compliance) का खर्च काफी बढ़ सकता है।

निवेशकों की नजर अब सरकारी हलफनामे पर है। यदि नियमों में बदलाव होता है, तो विशेष रूप से उन कंपनियों पर असर पड़ेगा जो टेट्रा पैक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करती हैं। अब मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह की समय-सीमा खत्म होने के बाद होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.