सुप्रीम कोर्ट ने टैक्स निर्धारण को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रोडक्ट पर टैक्स उसके बिक्री के समय के भौतिक स्वरूप (Physical Form) के आधार पर तय होगा, न कि इस पर कि ग्राहक उसका इस्तेमाल बाद में कैसे करता है। इस फैसले से Zydus Lifesciences को बड़ी राहत मिली है।
सुप्रीम कोर्ट ने हेल्थ सप्लीमेंट बनाने वाली कंपनियों के लिए एक अहम कानूनी नजीर पेश की है। जस्टिस मनमोहन और जस्टिस अरुण पल्ली की बेंच ने 5 अक्टूबर 2026 को यह फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया कि टैक्स का वर्गीकरण प्रोडक्ट के बिक्री के समय उसके भौतिक स्वरूप पर निर्भर करेगा, न कि उसके अंत में होने वाले उपयोग पर। यह मामला Zydus Lifesciences Ltd. (पुरानी Cadila Healthcare) के 'GRD पाउडर' और 'GRD मिक्स' से जुड़ा था, जो 1997-1998 के समय से लंबित था।\n\n### क्या था पूरा विवाद?\n\nरेवेन्यू विभाग का तर्क था कि चूंकि इन प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल ड्रिंक बनाने में होता है, इसलिए इन्हें 'नॉन-अल्कोहलिक ड्रिंक्स' की कैटेगरी में रखकर 10% टैक्स लगाया जाए। वहीं, कंपनी का कहना था कि ये प्रोडक्ट पाउडर या बिस्किट के रूप में बिकते हैं, इसलिए इन पर केवल 8% टैक्स लागू होना चाहिए।\n\n### कोर्ट का क्या रहा स्टैंड?\n\nसुप्रीम कोर्ट ने टैक्स विभाग की दलीलों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि टैक्स कानूनों की व्याख्या बहुत ही सख्ती के साथ की जानी चाहिए। अथॉरिटी इस बात का अनुमान नहीं लगा सकती कि ग्राहक भविष्य में उस प्रोडक्ट का उपयोग कैसे करेगा। यदि कंपनी पाउडर बेच रही है, तो टैक्स उसी के हिसाब से लगेगा, चाहे ग्राहक उसे दूध या पानी में मिलाकर पिए।\n\nयह फैसला न केवल Zydus Lifesciences के लिए एक बड़ी जीत है, बल्कि प्रोटीन पाउडर और अन्य हेल्थ मिक्स बनाने वाली पूरी इंडस्ट्री के लिए एक बड़ी राहत है। इससे भविष्य में टैक्स विभाग की ओर से मनमाने ढंग से टैक्स रेट थोपने की गुंजाइश कम हो जाएगी। हालांकि, निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि टैक्स से जुड़े मामले अक्सर राज्य के कानूनों पर निर्भर करते हैं, इसलिए हर केस की स्थिति अलग हो सकती है।
