Supreme Court: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के फैसले पर SC सख्त, हत्या की सजा कम करने पर उठाया सवाल

LAWCOURT
Whalesbook Logo
AuthorMehul Desai|Published at:
Supreme Court: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के फैसले पर SC सख्त, हत्या की सजा कम करने पर उठाया सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने 2021 के एक मर्डर केस में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के उस फैसले पर सवाल उठाए हैं, जिसमें हत्या की सजा को कम करके 'गैर-इरादतन हत्या' (Culpable Homicide) में बदल दिया गया था। कोर्ट ने राज्य सरकार और आरोपी को नोटिस जारी कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने साल 2021 में रायमोती पटेल की हत्या से जुड़े मामले में दखल दिया है। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के नवंबर 2024 के उस जजमेंट को चुनौती दी है, जिसमें आरोपी चिंतामणि उर्फ चिंटू पटेल की सजा को बदल दिया गया था।

मामले की पृष्ठभूमि

साल 2022 में निचली अदालत ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 के तहत दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। हालांकि, बाद में हाईकोर्ट ने इस फैसले को पलटते हुए इसे 'गैर-इरादतन हत्या' यानी धारा 304 पार्ट II के तहत वर्गीकृत कर दिया, जिसके बाद सजा घटकर 10 साल की हो गई।

कोर्ट की तीखी टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने हाईकोर्ट के फैसले की कड़ी आलोचना की है। जस्टिस पारदीवाला ने स्पष्ट रूप से कहा कि हाईकोर्ट हत्या और गैर-इरादतन हत्या के बीच के कानूनी अंतर को स्पष्ट करने में विफल रहा। बेंच ने टिप्पणी की कि हाईकोर्ट ने अपराध में इस्तेमाल किए गए हथियार और पीड़ित को लगी चोटों की गंभीरता जैसे जरूरी पहलुओं पर सही से विचार नहीं किया।

फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार और आरोपी चिंतामणि पटेल को नोटिस जारी किया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार और आरोपी अपनी दलीलों में क्या जवाब पेश करते हैं। कोर्ट का मुख्य उद्देश्य यह जांचना है कि क्या हाईकोर्ट का सजा कम करने का फैसला कानूनी रूप से सही था या इसे रद्द कर पुरानी सजा को बहाल किया जाना चाहिए।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.