कोर्टरूम वीडियो क्लिप्स पर SC का बड़ा फैसला: मीडिया को मिली नई पाबंदी!

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
कोर्टरूम वीडियो क्लिप्स पर SC का बड़ा फैसला: मीडिया को मिली नई पाबंदी!

सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया संस्थानों के लिए एक बड़ा फैसला सुनाया है। अब कोर्ट की कार्यवाही की ऑडियो-वीडियो क्लिप्स को बिना इजाज़त इस्तेमाल करने पर पाबंदी लगा दी गई है। यह कदम कोर्ट की रिकॉर्डिंग के व्यावसायिक दुरुपयोग और संदर्भ से हटकर इस्तेमाल को रोकने के लिए उठाया गया है।

क्या है कोर्ट का नया फरमान?

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने 31 जुलाई 2026 को मीडिया संगठनों के लिए कोर्ट की सुनवाई की ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग के इस्तेमाल को लेकर नए नियम तय किए हैं। कोर्ट ने साफ किया है कि भले ही मीडिया संस्थान कानूनी मामलों और कार्यवाही की रिपोर्टिंग कर सकते हैं, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के महासचिव या संबंधित हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल से पूर्व अनुमति लिए बिना किसी भी ऑडियो-वीडियो क्लिप (चाहे वह रॉ हो या एडिटेड) का उपयोग नहीं किया जा सकेगा।

यह आदेश 24 जुलाई को जारी अंतरिम निर्देश के बाद आया है, जिसने कोर्ट की रिकॉर्डिंग के प्रसार पर लगे प्रतिबंधों को लेकर भ्रम पैदा कर दिया था। कोर्ट का यह नया रुख विशेष रूप से डिजिटल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर न्यायिक कार्यवाही के व्यावसायिक शोषण को रोकने के उद्देश्य से है। ज्यूडिशियरी ने चिंता जताई है कि सुनवाई के छोटे, संदर्भ से बाहर या AI-मैनिपुलेटेड वीडियो का इस्तेमाल '24x7 मनोरंजन' के लिए किया जा रहा है, न कि जिम्मेदार रिपोर्टिंग के लिए। इससे कानूनी प्रक्रिया की गरिमा को ठेस पहुँच सकती है।

डिजिटल मीडिया पर क्या होगा असर?

मीडिया कंपनियों, खासकर डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया चैनलों के लिए, इस फैसले से उनकी कंटेंट स्ट्रेटेजी में बदलाव की ज़रूरत होगी। कई मीडिया आउटलेट्स YouTube, Instagram और X (पूर्व में Twitter) जैसे प्लेटफॉर्म पर एंगेजमेंट और व्यूअरशिप बढ़ाने के लिए कोर्ट की सुनवाई के वीडियो स्निपेट्स पर बहुत निर्भर करते रहे हैं। अब किसी भी ऑडियो-विजुअल फुटेज का उपयोग करने से पहले औपचारिक अनुमति लेने की आवश्यकता से ऑपरेशनल टाइमलाइन बढ़ सकती है और रियल-टाइम वीडियो कवरेज की क्षमता सीमित हो सकती है।

हालांकि, लिखित रिपोर्टिंग और दलीलों के सारांश की अनुमति पूरी तरह से है। यह प्रतिबंध उस विजुअल कंपोनेंट को लक्षित करता है जो आधुनिक डिजिटल समाचार उपभोग का एक अहम हिस्सा बन गया है। मीडिया संगठनों को अब अपने आंतरिक अनुपालन प्रोटोकॉल की समीक्षा करनी होगी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कोर्ट के अधिकारियों से आवश्यक प्राधिकरण के बिना किसी भी कोर्टरूम फुटेज का प्रसारण या प्रकाशन न हो।

आगे क्या?

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 18 सितंबर 2026 की तारीख तय की है। इस सुनवाई में केंद्र सरकार, सोशल मीडिया इंटरमीडियरी और हाई कोर्ट्स से और प्रतिक्रियाएं आने की उम्मीद है। निवेशकों और मीडिया हितधारकों को इस तारीख पर नज़र रखनी चाहिए, क्योंकि इस दिन डिजिटल प्लेटफॉर्म न्यायिक सामग्री को कैसे संभालते हैं, इस पर अतिरिक्त दिशानिर्देश या स्पष्ट प्रोटोकॉल आ सकते हैं। साथ ही, लाइव-स्ट्रीम की गई कार्यवाही के आधिकारिक संग्रह और पहुंच के लिए भी नियम बनाए जा सकते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.