सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के फैसले पर मुहर लगाते हुए तमिलनाडु सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसके तहत धर्म परिवर्तन कर इस्लाम अपनाने वालों को कास्ट-बेस्ड रिजर्वेशन (Reservation) का लाभ देने की कोशिश की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार की चुनौती को खारिज करते हुए मार्च 2024 के उस निर्देश को अमान्य कर दिया है, जिसमें हिंदू समुदायों से धर्म परिवर्तन कर इस्लाम अपनाने वाले लोगों को बैकवर्ड क्लास मुस्लिम रिजर्वेशन का लाभ देने का प्रस्ताव था। कोर्ट की बेंच ने स्पष्ट किया है कि हिंदू जाति व्यवस्था से जुड़ा सामाजिक पिछड़ापन एक विशेष कानूनी और सामाजिक ढांचा है, जो किसी गैर-हिंदू धर्म में परिवर्तन करने पर स्वतः स्थानांतरित नहीं होता।
मामले की पृष्ठभूमि
यह पूरा मामला 2015 में धर्म परिवर्तन के बाद 'मुस्लिम लब्बाई' समुदाय के सदस्य के रूप में मान्यता मांगने वाली एक याचिका से शुरू हुआ था। राज्य सरकार का तर्क था कि यह नीति धर्मांतरित लोगों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति की रक्षा के लिए थी, लेकिन न्यायपालिका ने यह स्पष्ट कर दिया कि हिंदू धर्म के भीतर जन्म और वंश पर आधारित श्रेणियां, इस्लाम की संरचना से अलग हैं, जहां इस तरह के जाति-आधारित स्तरीकरण का आधार रिजर्वेशन के लिए अलग है।
संस्थानों और निवेशकों पर क्या होगा असर?
राज्य में काम कर रहे संस्थानों और कॉरपोरेट्स के लिए यह फैसला कानूनी और नियामक स्थिरता के लिहाज से अहम है। शिक्षा और एचआर (HR) सेक्टर जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले संस्थानों के लिए रिजर्वेशन पॉलिसी में बदलाव हमेशा अनिश्चितता पैदा करते हैं। कोर्ट के इस फैसले से अब हायरिंग और एडमिशन पॉलिसी बनाने में अधिक स्पष्टता आएगी। यह फैसला भविष्य की सरकारी नीतियों के लिए एक बेंचमार्क की तरह काम करेगा, जिससे भविष्य में अचानक होने वाले नीतिगत उलटफेर का जोखिम कम हो गया है।
