NSE IPO: सुप्रीम कोर्ट से चित्रा रामकृष्ण को बड़ा झटका, IPO पर टिकी सबकी नजरें

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AuthorNeha Patil|Published at:
NSE IPO: सुप्रीम कोर्ट से चित्रा रामकृष्ण को बड़ा झटका, IPO पर टिकी सबकी नजरें

सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की पूर्व एमडी चित्रा रामकृष्ण की याचिका को खारिज कर दिया है। को-लोकेशन मामले में कानूनी कार्यवाही जारी रहने के बीच, एक्सचेंज का बहुप्रतीक्षित IPO **17 सितंबर, 2026** को आने वाला है।

कोर्ट का रुख और कानूनी लड़ाई

15 सितंबर, 2026 को जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने चित्रा रामकृष्ण की उस याचिका को ठुकरा दिया, जिसमें उन्होंने को-लोकेशन मामले में अपने खिलाफ चल रही कार्यवाही को चुनौती दी थी। चित्रा का तर्क था कि NSE एक प्राइवेट एंटिटी है, इसलिए उन पर 'पब्लिक सर्वेंट' के तहत केस नहीं चलना चाहिए। हालांकि, कोर्ट ने इस दलील को ट्रायल कोर्ट के स्तर पर रखने का निर्देश दिया है, जिससे उनके खिलाफ क्रिमिनल ट्रायल जारी रहेगा।

क्या है को-लोकेशन केस?

CBI इस मामले की जांच कर रही है, जिसमें 2010 से 2014 के बीच चुनिंदा ब्रोकर्स को सर्वर का फायदा देने के आरोप हैं।

NSE IPO पर क्या है अपडेट?

यह कानूनी हलचल ऐसे समय में सामने आई है जब NSE अपना IPO लाने की तैयारी कर रहा है। कंपनी ने इसके लिए प्राइस बैंड ₹1,700 से ₹1,785 प्रति शेयर तय किया है।

हाल ही में NSE ने SEBI के साथ को-लोकेशन और डार्क फाइबर केस में ₹1,491.21 करोड़ का सेटलमेंट किया है, जिससे IPO का रास्ता साफ हुआ था। अब निवेशकों की नजरें इस बात पर हैं कि पूर्व अधिकारी से जुड़े ये कानूनी मामले एक्सचेंज के लिस्टिंग के बाद के गवर्नेंस पर क्या असर डालते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.