Supreme Court: दवाओं की कीमतों पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सवाल, Pharma शेयरों में बढ़ सकती है हलचल

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AuthorAditya Rao|Published at:
Supreme Court: दवाओं की कीमतों पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सवाल, Pharma शेयरों में बढ़ सकती है हलचल

दवाओं की कीमतों पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है कि आखिर क्यों प्राइस कैप (Price Cap) सिर्फ कैंसर की दवाओं तक ही सीमित है। कोर्ट ने जरूरी दवाओं पर भारी मार्कअप पर चिंता जताई है, जिससे फार्मा और हॉस्पिटल सेक्टर के मुनाफे पर असर पड़ने की आशंका है।

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की ड्रग प्राइसिंग पॉलिसी की समीक्षा शुरू कर दी है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने सरकार से पूछा है कि जब अन्य जरूरी दवाएं भी आम जनता के लिए महत्वपूर्ण हैं, तो प्राइस कंट्रोल का दायरा सिर्फ कैंसर की दवाओं तक ही क्यों सीमित है? कोर्ट ने 'Price to Retailer' (PTR) और 'Maximum Retail Price' (MRP) के बीच के बड़े अंतर पर सख्त रुख अपनाया है।

निवेशकों के लिए क्या है जोखिम?

फार्मा और हॉस्पिटल सेक्टर की कई कंपनियां अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा ऐसी दवाओं के ट्रेड मार्जिन से जुटाती हैं जो 'नॉन-शेड्यूल्ड' कैटेगरी में आती हैं। अभी तक इन दवाओं की कीमतों में काफी छूट होती है, जबकि DPCO 2013 के तहत शेड्यूल्ड दवाओं पर मार्जिन 16% के करीब फिक्स है। कैंसर की दवाओं पर हाल ही में 30% का मार्जिन कैप लगाया गया था, लेकिन कोर्ट का नया रुख संकेत दे रहा है कि सरकार इस दायरे को और बढ़ा सकती है।

मार्जिन पर दबाव की आशंका

अगर सरकार सभी जरूरी दवाओं के लिए एक समान और सख्त प्राइसिंग नियम लागू करती है, तो हॉस्पिटल चेन और रिटेल फार्मेसी नेटवर्क का प्रॉफिट मार्जिन सीधे तौर पर प्रभावित होगा। ये कंपनियां फिलहाल ऊंची कीमतों के जरिए अपने ऑपरेटिंग खर्चों को मैनेज करती हैं।

फिलहाल, कोर्ट ने सरकार को मार्केटिंग प्रथाओं और प्राइसिंग फ्रेमवर्क की जांच के लिए एक कमेटी बनाने का निर्देश दिया है। इस रेगुलेटरी अनिश्चितता के कारण फार्मा और हॉस्पिटल सेक्टर के शेयरों में हाल ही में उतार-चढ़ाव देखा गया है। बाजार की नजरें अब अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जो इस सेक्टर के भविष्य को दिशा देगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.