सुप्रीम कोर्ट ने Jharkhand की **2025** पुलिस चीफ नियुक्ति नियमावली पर सवाल खड़े किए हैं। कोर्ट का कहना है कि यह **2006** के प्रकाश सिंह जजमेंट का उल्लंघन हो सकता है। फिलहाल, DGP तदाशा मिश्रा को नोटिस जारी किया गया है क्योंकि उनकी नियुक्ति रिटायरमेंट से महज एक दिन पहले हुई थी।
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच के साथ 'Selection and Appointment of Director General and Inspector General of Police, Jharkhand Regulation, 2025' की समीक्षा शुरू कर दी है। यह कानूनी कार्रवाई इस बात पर केंद्रित है कि क्या राज्य के नियम 2006 के ऐतिहासिक प्रकाश सिंह मामले के फैसले के अनुरूप हैं।
क्या है प्रकाश सिंह जजमेंट का नियम?
प्रकाश सिंह मामले में कोर्ट ने स्पष्ट गाइडलाइंस दी थीं कि DGP पद के उम्मीदवार के पास रिटायरमेंट के लिए कम से कम 6 महीने का कार्यकाल शेष होना चाहिए। हालांकि, झारखंड के वर्तमान 2025 के नियमों में इस अनिवार्यता को नजरअंदाज किए जाने की बात सामने आई है।
तदाशा मिश्रा की नियुक्ति पर विवाद
कोर्ट की नजर 30 दिसंबर 2025 को तदाशा मिश्रा की DGP के रूप में हुई नियुक्ति पर है। रिकॉर्ड बताते हैं कि यह नियुक्ति उनके सुपरएनुएशन (रिटायरमेंट) से सिर्फ एक दिन पहले की गई थी। इस मामले में कोर्ट ने तदाशा मिश्रा को औपचारिक नोटिस जारी किया है ताकि वे अपना पक्ष रख सकें।
सरकार का रुख और अगला कदम
सुनवाई के दौरान झारखंड सरकार ने विवादित नियमों की समीक्षा करने और उनमें बदलाव करने की इच्छा जताई है। साथ ही, कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन को 'amicus curiae' नियुक्त किया है, जो इस बात की जांच करेंगे कि क्या अन्य राज्यों में भी ऐसी प्रथाएं नियमों के खिलाफ हैं। इस मामले की अगली सुनवाई एक हफ्ते बाद होगी।
नोट: यह एक पूरी तरह से प्रशासनिक और कानूनी मामला है, जिसका किसी भी लिस्टेड कंपनी या शेयर बाजार के प्रदर्शन से कोई लेना-देना नहीं है। निवेशकों को इस घटनाक्रम को केवल गवर्नेंस के नजरिए से देखना चाहिए।
