2,000 से ज्यादा नागरिकों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर Election Commission की इलेक्टोरल रोल रिविजन प्रक्रिया पर रोक की मांग की है। इसमें ECINet प्लेटफॉर्म में तकनीकी खामियों और कमीशन के अंदरूनी मतभेदों का आरोप लगाया गया है।
सुप्रीम कोर्ट में दायर इस याचिका में पूर्व अधिकारियों और अर्थशास्त्रियों सहित 2,000 से अधिक नागरिकों ने Election Commission of India (ECI) की ओर से चल रहे 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' को तुरंत रोकने की मांग की है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि वोटर रजिस्ट्रेशन सिस्टम में गंभीर तकनीकी चुनौतियां हैं, जो चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं।
ECINet प्लेटफॉर्म पर सवाल
याचिका का मुख्य केंद्र ECINet प्लेटफॉर्म है, जिसका उपयोग ECI वोटर डेटा मैनेजमेंट के लिए करती है। आरोप है कि सॉफ्टवेयर और 'फॉर्म 6' (Form 6) में बिना किसी दस्तावेजीकरण के बदलाव किए गए हैं, जिससे नए मतदाताओं को रजिस्ट्रेशन में दिक्कतें आ रही हैं। एक उदाहरण के तौर पर, गोवा की घटना का जिक्र है, जहां सॉफ्टवेयर लॉक के कारण 97 पात्र मतदाताओं का रजिस्ट्रेशन नहीं हो सका।
कमीशन के अंदरूनी मतभेद
सिर्फ तकनीकी ही नहीं, बल्कि कमीशन के नेतृत्व के बीच 'इंटरनल फ्रिक्शन' की खबरें भी सामने आई हैं। फाइलिंग के अनुसार, पिछले 10 महीनों में 14 बार चुनाव आयुक्तों ने ECI टेक्नोलॉजी सिस्टम, फॉर्म में बदलाव और डेटा डिलीट करने के फैसलों पर आपत्ति जताई है। हालांकि ECI इसे सामान्य तकनीकी चर्चा बताती रही है, लेकिन याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि बार-बार होने वाले ये मतभेद प्रशासनिक विफलता की ओर इशारा करते हैं।
सुप्रीम कोर्ट से मांग
याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट एक स्वतंत्र एक्सपर्ट कमेटी का गठन करे, जो ECINet प्लेटफॉर्म का कानूनी और सुरक्षा ऑडिट करे। साथ ही, तकनीकी खामियों के कारण जिन वोटरों के नाम हटा दिए गए हैं, उन्हें तुरंत बहाल करने का आग्रह किया गया है। बाजार और गवर्नेंस के लिहाज से, कोर्ट का यह फैसला संस्थागत स्थिरता के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
