सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को बाल शोषण से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री को तुरंत हटाने और ऐसी सामग्री से होने वाली कमाई (Monetization) को रोकने का कड़ा निर्देश दिया है। कोर्ट ने सरकार से कहा है कि नियमों का पालन न करने पर कंपनियों के सालाना टर्नओवर के आधार पर जुर्माना लगाने का फ्रेमवर्क तैयार करें।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स अब ऐसी किसी भी सामग्री से मुनाफा नहीं कमा सकते जो बाल शोषण से जुड़ी हो। कोर्ट ने माना कि इस दिशा में पहले किए गए प्रयास नाकाफी रहे हैं और अब कंपनियों को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।
टर्नओवर से जुड़ेगा जुर्माना (Penalty Framework)
सरकार को अब एक ऐसा नया ढांचा तैयार करने का निर्देश दिया गया है जिसके तहत नियम तोड़ने वाली कंपनियों पर भारी आर्थिक दंड लगाया जाएगा। यह जुर्माना केवल एक तय रकम नहीं होगा, बल्कि इसे कंपनी के कुल सालाना टर्नओवर और उल्लंघन की गंभीरता के आधार पर तय किया जाएगा। इसके अलावा, ऐसी सामग्री से विज्ञापन या सब्सक्रिप्शन के जरिए हुई किसी भी कमाई को जब्त करना अनिवार्य होगा।
तकनीकी अपग्रेड की जरूरत
अदालत ने इन कंपनियों को अवैध कंटेंट की पहचान के लिए 'परसेप्चुअल हैश मैचिंग' और 'यूआरएल लिस्टिंग' जैसी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करने को कहा है। सरकार इस काम के लिए एक राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार करेगी।
निवेशकों के लिए रिस्क और चुनौतियां
यह आदेश IT Rules 2021 को और अधिक सख्त बनाता है। डिजिटल कंपनियों के लिए अब कंटेंट मॉडरेशन सॉफ्टवेयर और निगरानी प्रणालियों (Monitoring Systems) में भारी निवेश करना मजबूरी हो गया है। निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि सरकार जुर्माने के नियम कितने कड़े बनाती है और इन तकनीकी बदलावों के चलते कंपनियों के ऑपरेशनल खर्च (Operational Costs) पर कितना असर पड़ता है।
