सुप्रीम कोर्ट ने RBI को आदेश दिया है कि बैंकों और NBFCs के लिए गाड़ी उठाने (Vehicle Repossession) के नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। Cholamandalam Investment and Finance Company के एक केस में कोर्ट ने कंपनी पर हर्जाना भी लगाया है, जिससे व्हीकल फाइनेंस सेक्टर के लिए रेगुलेटरी जोखिम बढ़ गए हैं।
कोर्ट का बड़ा फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने 16 सितंबर, 2026 को एक लैंडमार्क फैसला सुनाते हुए RBI को आदेश दिया है कि बैंकों और NBFCs के लिए वाहन जब्ती के मौजूदा नियमों का कड़ाई से पालन करवाया जाए। यह मामला Cholamandalam Investment and Finance Company से जुड़ा है, जहां कोर्ट ने कंपनी को आदेश दिया कि वह उधारकर्ता को ₹4.5 लाख रिफंड करे और हर्जाने के तौर पर ₹10 लाख का भुगतान करे। कोर्ट ने कहा कि लोन एग्रीमेंट में मौजूद शर्तें कानूनी प्रक्रियाओं को दरकिनार करने का लाइसेंस नहीं देती हैं।
निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत?
व्हीकल फाइनेंस सेक्टर की कई NBFCs का बिजनेस मॉडल इस बात पर टिका है कि डिफॉल्ट होने पर वे तेजी से एसेट रिकवर कर सकें। कोर्ट के इस फैसले ने 'सेल्फ-हेल्प' जब्ती के दायरे को काफी कम कर दिया है। अब लेंडर्स बलपूर्वक या मनमाने तरीकों से गाड़ी जब्त नहीं कर पाएंगे, भले ही एग्रीमेंट में ऐसी क्लॉज मौजूद हों।
मुनाफे पर असर की आशंका
इन्वेस्टर्स के लिए अब यह देखना जरूरी होगा कि रिकवरी प्रोसेस कितना धीमा होता है। यदि लेंडर्स को औपचारिक या कोर्ट के जरिए रिकवरी के रास्ते अपनाने पड़ते हैं, तो बैड लोन सेटलमेंट में देरी हो सकती है। साथ ही, रिकवरी प्रोटोकॉल अपडेट करने और कम्प्लायंस जोखिमों को संभालने में होने वाला खर्च कंपनियों के नेट प्रॉफिट पर दबाव डाल सकता है। अब बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि बड़ी फाइनेंस कंपनियां अपनी कलेक्शन स्ट्रैटेजी में क्या बदलाव करती हैं।
