Supreme Court का कड़ा आदेश: दिल्ली में हटेंगे बैरिकेड्स और बहाल होंगी Metro सेवाएं

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Supreme Court का कड़ा आदेश: दिल्ली में हटेंगे बैरिकेड्स और बहाल होंगी Metro सेवाएं

दिल्ली में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बीच, सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को तत्काल प्रभाव से बैरिकेड्स हटाने और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को बहाल करने का निर्देश दिया है। जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने मनमानी हिरासत पर रोक लगाते हुए सरकार से 13 अक्टूबर, 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट मांगी है।

सुप्रीम कोर्ट ने एक आपातकालीन सुनवाई में दिल्ली पुलिस और केंद्रीय अधिकारियों को राजधानी भर में लगाए गए प्रतिबंधात्मक बैरिकेड्स हटाने और मनमानी हिरासत को समाप्त करने का सख्त निर्देश दिया है। चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों के चलते मेट्रो और रेल सेवाओं में आई बाधाओं को लेकर कोर्ट ने गहरी चिंता जताई है।

अदालती हस्तक्षेप का महत्व

बेंच ने स्पष्ट किया है कि वकीलों, पत्रकारों और नागरिकों की कानूनी परिसरों तक पहुंच सुनिश्चित करना अनिवार्य है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट परिसर के पास से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 से संबंधित साइनबोर्ड हटाने का भी आदेश दिया है। कोर्ट ने जोर दिया कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना राज्य की जिम्मेदारी है, लेकिन यह मूलभूत अधिकारों या आवश्यक परिवहन सेवाओं को बाधित नहीं कर सकता।

बिजनेस और इकॉनमी पर असर

आर्थिक दृष्टिकोण से, दिल्ली में सामान्य जनजीवन की बहाली बेहद महत्वपूर्ण है। बैरिकेड्स और मेट्रो स्टेशन बंद होने से कर्मचारियों की आवाजाही, लॉजिस्टिक्स और खुदरा व्यापार पर सीधा नकारात्मक असर पड़ा था। कई बिजनेस दिल्ली मेट्रो नेटवर्क पर निर्भर हैं, इसलिए कोर्ट का यह फैसला सर्विस और रिटेल सेक्टर के लिए बड़ी राहत लेकर आया है।

आगे की राह

केंद्र सरकार के सॉलिसिटर जनरल को 13 अक्टूबर, 2026 तक एक औपचारिक अनुपालन रिपोर्ट और विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। निवेशक और मार्केट एक्सपर्ट्स इस स्थिति पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि दिल्ली में बुनियादी ढांचे की स्थिरता नेशनल कैपिटल रीजन में कॉरपोरेट संचालन के लिए अहम है।

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