सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में पुलिस एनकाउंटर में होने वाली मौतों की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने PUCL केस की **16**-बिंदु गाइडलाइंस को सख्ती से लागू करने को कहा है, जो देश के कानूनी ढांचे और निवेश के लिहाज से एक महत्वपूर्ण कदम है।
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि पुलिस एनकाउंटर में होने वाली मौतों को अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने इन मामलों की कड़ी और स्वतंत्र जांच अनिवार्य कर दी है। यह फैसला संवैधानिक मर्यादा को बनाए रखने के लिए लिया गया है। कोर्ट ने 'पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (PUCL) बनाम महाराष्ट्र राज्य' मामले में तय की गई 16-बिंदु गाइडलाइंस का पालन हर हाल में सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
असम का उदाहरण और एक्शन
यह सख्ती 'आरिफ मोहम्मद यासीन ज्वाद्दर बनाम असम राज्य' मामले के बाद सामने आई है। डेटा के मुताबिक, मई 2021 से अगस्त 2022 के बीच असम में 171 ऐसी घटनाएं हुईं, जिनमें 56 लोगों की जान गई और 145 लोग घायल हुए। कोर्ट ने असम मानवाधिकार आयोग को इन मामलों की तय समय सीमा के भीतर जांच पूरी करने का आदेश दिया है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
इन्वेस्टमेंट कम्युनिटी के लिए किसी भी देश का कानून-व्यवस्था का ढांचा उसकी 'इंस्टीट्यूशनल हेल्थ' का पैमाना होता है। नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन (NHRC) के आंकड़ों के अनुसार, 2016 से 2022 के बीच देश भर में 800 से ज्यादा एनकाउंटर के केस दर्ज हुए, लेकिन पुलिसकर्मियों को सजा मिलने की दर काफी कम रही है।
निवेशक हमेशा गवर्नेंस और सोशल रिस्क को ध्यान में रखते हैं। कोर्ट का यह फैसला यह सुनिश्चित करने के लिए है कि सरकारी मशीनरी कानून के दायरे में रहकर काम करे। जब न्यायिक तंत्र मजबूत होता है, तो लंबे समय में देश में रेगुलेटरी और सोशल स्टैबिलिटी बढ़ती है, जो कि एक हेल्दी बिजनेस एनवायरमेंट के लिए बहुत जरूरी है। अब बाजार की नजर इस बात पर होगी कि अलग-अलग राज्य इन निर्देशों का पालन कैसे करते हैं, क्योंकि यही पारदर्शिता भारत के निवेश माहौल की विश्वसनीयता को और मजबूत करेगी।
