Supreme Court का बड़ा फैसला: अब नई कारों का 4 साल, बाइक्स का 6 साल का इंश्योरेंस होगा अनिवार्य!

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AuthorNeha Patil|Published at:
Supreme Court का बड़ा फैसला: अब नई कारों का 4 साल, बाइक्स का 6 साल का इंश्योरेंस होगा अनिवार्य!

सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत देते हुए नई गाड़ियों के थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस की अवधि बढ़ा दी है। अब नई कारों के लिए **4 साल** और नई दोपहिया वाहनों के लिए **6 साल** का इंश्योरेंस लेना अनिवार्य होगा। इस फैसले का मकसद सड़कों पर बिना इंश्योरेंस वाले वाहनों की संख्या कम करना है।

इंश्योरेंस नियमों में आया भूचाल!

सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने ऑटोमोबाइल और इंश्योरेंस सेक्टर को हिला देने वाला फैसला सुनाया है। 4 अगस्त 2026 से, नए वाहनों के साथ अब सिर्फ एक साल का थर्ड-पार्टी कवर नहीं मिलेगा। इसके बजाय, कार खरीदारों को 4 साल और दोपहिया वाहन खरीदारों को 6 साल का इंश्योरेंस पैकेज लेना ही होगा। इस न्यायिक आदेश का मुख्य उद्देश्य सड़कों पर लावारिस घूम रहे अनइंश्योर्ड वाहनों की संख्या पर लगाम लगाना है, जो अक्सर दुर्घटना पीड़ितों को मुआवजा दिलाने में बाधा डालते हैं।

टेक्नोलॉजी से होगी निगरानी!

इस नियम को सख्ती से लागू करने के लिए, कोर्ट ने ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरों को इंश्योरेंस इंफॉर्मेशन ब्यूरो ऑफ इंडिया और सरकार के VAHAN डेटाबेस से जोड़ने का आदेश दिया है। इससे पुलिस रियल-टाइम में मोबाइल ऐप के जरिए इंश्योरेंस की स्थिति जांच सकेगी। अगर कोई गाड़ी अनइंश्योर्ड पाई जाती है, तो तुरंत डिजिटल चालान काटा जाएगा।

इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स पर असर

नई गाइडलाइन्स के तहत, इंश्योरेंस कंपनियां वाहन बिक्री के समय 4-टियर पॉलिसी स्ट्रक्चर पेश करेंगी। इसमें अनिवार्य थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस के साथ-साथ ओनर्स और यात्रियों के लिए एक्सीडेंटल कवर, और गाड़ी के डैमेज से सुरक्षा जैसे ऑप्शनल कवर भी शामिल होंगे। IRDAI थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस की कीमत तय करेगा, लेकिन ऑप्शनल कवर्स के प्रीमियम पर इंश्योरेंस कंपनियों की अपनी मर्जी चलेगी।

नई चुनौतियां और समाधान

एक दिलचस्प प्रस्ताव यह भी है कि फ्यूल बिक्री को सीधे वाहन के इंश्योरेंस स्टेटस से जोड़ा जाए। यानी, अगर गाड़ी का इंश्योरेंस नहीं है, तो उसे फ्यूल भी नहीं मिलेगा। हालांकि, इसे लागू करने के लिए फ्यूल रिटेलर्स, इंश्योरेंस डेटाबेस और अधिकारियों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत होगी। इस बदलाव से इंश्योरेंस कंपनियों को शुरुआत में ज्यादा प्रीमियम मिलेगा, लेकिन लंबी अवधि की पॉलिसी लायबिलिटीज को मैनेज करना भी एक चुनौती होगी। कोर्ट ने मार्च 2022 से लंबित पुराने एक्सीडेंट क्लेम्स के निपटारे के लिए पुलिस को डिटेल्ड एक्सीडेंट रिपोर्ट्स जल्द से जल्द जमा करने का निर्देश भी दिया है। कोर्ट 18 अगस्त 2026 को इन पहलों की प्रगति की समीक्षा करेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.