डिजिटल अरेस्ट के बढ़ते मामलों पर लगाम लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट सख्त हो गया है। कोर्ट ने RBI को निर्देश दिए हैं कि वह 'म्यूल' (mule) बैंक अकाउंट्स को कंट्रोल करने के लिए **4 हफ्ते** के भीतर सख्त SOP तैयार करे, ताकि बैंकिंग सिस्टम को साइबर फ्रॉड से बचाया जा सके।
कोर्ट की सख्ती से बदलेंगे बैंकिंग नियम
सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) जैसे गंभीर साइबर अपराधों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। चीफ जस्टिस Surya Kant ने साफ कर दिया है कि न्यायपालिका अब आर्थिक अपराधों को रोकने के लिए सक्रिय हस्तक्षेप करेगी। 4 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने 13 अहम दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जो सीधे तौर पर फाइनेंशियल सेक्टर के लिए बड़े बदलाव लाएंगे।
क्या हैं 'म्यूल अकाउंट्स' और बैंकिंग पर असर?
'म्यूल' (mule) अकाउंट्स वे खाते होते हैं जिनका इस्तेमाल साइबर अपराधी चोरी के पैसे को एक जगह से दूसरी जगह घुमाने और फिर विदेशों में भेजने के लिए करते हैं। अब RBI को इन खातों पर नजर रखने के लिए एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) बनाना होगा। इसके चलते बैंकों को अपने मॉनिटरिंग सिस्टम और मजबूत करने होंगे। बैंकों को अब संदिग्ध ट्रांजेक्शन को पकड़ने के लिए नई टेक्नोलॉजी और कंप्लायंस पर ज्यादा खर्च करना होगा।
रिकवरी और राहत के आंकड़े
कठोर कदमों का असर दिखना शुरू हो गया है। भारतीय साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर की रिपोर्ट के मुताबिक, डिजिटल अरेस्ट की शिकायतें 2024 में 1,23,672 थीं, जो घटकर जून 2026 में 16,377 रह गई हैं। इतना ही नहीं, कोर्ट की पहल से 57 अलग-अलग बैंकों के 36,290 मामलों में लगभग ₹18.05 करोड़ की राशि वापस रिकवर की गई है।
निवेशकों और बाजार के जानकारों को अब RBI की आने वाली नई गाइडलाइंस पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि बैंकों के लिए कस्टमर सर्विस और बढ़ते कंप्लायंस के बीच संतुलन बनाना एक बड़ी चुनौती होगी।
