Punjab Corruption Probe: सुप्रीम कोर्ट ने CBI की कार्रवाई पर लगाई रोक, अधिकारियों को बड़ी राहत

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Punjab Corruption Probe: सुप्रीम कोर्ट ने CBI की कार्रवाई पर लगाई रोक, अधिकारियों को बड़ी राहत

पंजाब सरकार के अधिकारियों के खिलाफ चल रही करप्शन जांच में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा दखल दिया है। कोर्ट ने CBI की किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर फिलहाल अंतरिम रोक लगा दी है।

सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें जस्टिस एमएम सुंद्रेश और जस्टिस पीबी वराले शामिल थे, ने पंजाब सरकार से जुड़े अधिकारियों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने CBI को आदेश दिया है कि वह फिलहाल इन अधिकारियों के खिलाफ कोई भी दंडात्मक कदम न उठाए। यह आदेश तब आया है जब सुप्रीम कोर्ट पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के उस पुराने आदेश को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई कर रहा था, जिसमें CBI को जांच के निर्देश दिए गए थे।

जांच का आधार और विवाद

हाई कोर्ट ने सरकारी ट्रांसफर, पोस्टिंग, टेंडर प्रोसेस और पॉलिसी फैसलों में भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए सेंट्रल एजेंसी को हरी झंडी दी थी। यह मामला वकील निखिल सरफ द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) के बाद शुरू हुआ था, जिसमें प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) द्वारा साझा की गई सामग्री का हवाला दिया गया था। हालांकि कोर्ट ने सुरक्षा कवच दिया है, लेकिन FIR को रद्द नहीं किया गया है, यानी कानूनी केस अभी भी बरकरार है।

कानूनी पेंच और अधिकार क्षेत्र का मुद्दा

विवाद की जड़ में प्रक्रियात्मक अनुपालन और राज्य में केंद्रीय एजेंसियों का अधिकार क्षेत्र है। पंजाब सरकार का तर्क है कि हाई कोर्ट का आदेश कानूनी आवश्यकताओं को दरकिनार कर दिया गया था। सरकार ने Prevention of Corruption Act की Section 17A का हवाला देते हुए कहा है कि किसी भी प्रशासनिक निर्णय की जांच से पहले वैधानिक मंजूरी जरूरी है। इसके अलावा, राज्य सरकार ने 2020 के अपने उस फैसले को भी याद दिलाया है जिसके तहत राज्य में CBI की सामान्य जांच के लिए दी गई सहमति वापस ले ली गई थी।

यह मामला अब केंद्र और राज्य की जांच एजेंसियों के बीच शक्ति संतुलन का एक बड़ा टेस्ट बन गया है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला यह तय करेगा कि क्या प्रशासनिक फैसलों की जांच में सभी कानूनी सुरक्षा उपायों का पालन किया गया था या नहीं। फिलहाल, निवेशकों और नीति निर्माताओं की नजर इस पर टिकी है क्योंकि इसका असर भविष्य की प्रशासनिक जांचों पर पड़ेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.