जल जीवन मिशन भ्रष्टाचार मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के पूर्व मंत्री Mahesh Chandra Joshi और मुकेश पाठक को जमानत दे दी है। कोर्ट ने माना कि जांच पूरी होने और सबूत दस्तावेज के रूप में होने के कारण उन्हें जेल में रखने की जरूरत नहीं है।
कोर्ट का क्या है तर्क?
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपंकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने राजस्थान हाई कोर्ट के उस आदेश को पलट दिया, जिसमें पहले जमानत देने से इनकार कर दिया गया था। कोर्ट ने साफ कहा कि हालांकि आरोप गंभीर हैं, लेकिन ट्रायल शुरू होने से पहले ही किसी को जेल में रखना सजा की तरह नहीं हो सकता। चूंकि जांच पूरी हो चुकी है और पूरा केस करीब 20,000 पन्नों के दस्तावेजों पर आधारित है, इसलिए सबूतों के साथ छेड़छाड़ का खतरा सीमित है।
मामले की वर्तमान स्थिति
यह मामला जल जीवन मिशन के तहत टेंडर में हुई कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। इसमें अब तक 22 आरोपी बनाए गए हैं, 3 चार्जशीट दाखिल हो चुकी हैं और 124 अभियोजन गवाह (prosecution witnesses) शामिल हैं।
जमानत की कड़ी शर्तें
कोर्ट ने रिहाई के लिए कुछ सख्त शर्तें तय की हैं। दोनों आरोपियों को केस से जुड़े किसी भी व्यक्ति को धमकाने या प्रभावित करने की मनाही है। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि सबूतों से छेड़छाड़ की कोई भी कोशिश की गई, तो उनकी जमानत तुरंत रद्द कर दी जाएगी। अभी यह एक कानूनी प्रक्रिया है, इसका मतलब आरोपों से बरी होना नहीं है, लेकिन इसने केस को एक नई दिशा दे दी है।
