सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को राज्य के हर जिले में Navodaya Vidyalayas स्थापित करने के लिए जमीन खोजने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने इसके लिए **3 महीने** का समय दिया है, हालांकि यह आदेश अंतिम फैसले के अधीन है क्योंकि राज्य और केंद्र के बीच भाषा नीति को लेकर विवाद अब भी जारी है।
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को राज्य के सभी जिलों में Navodaya Vidyalayas के निर्माण के लिए उपयुक्त भूमि की पहचान करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने साफ किया है कि यह एक अंतरिम आदेश है और मामले पर अंतिम फैसला अभी आना बाकी है। कोर्ट ने केंद्र और राज्य दोनों के प्रतिनिधियों को निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई से पहले वे नीतिगत मुद्दों पर आपसी चर्चा करें।
विवाद की मुख्य वजह क्या है?
यह सारा मामला शिक्षा नीति में भाषा के चयन को लेकर है। तमिलनाडु लंबे समय से अपनी 'टू-लैंग्वेज पॉलिसी' (तमिल और अंग्रेजी) का पालन कर रहा है, जिसे वह अपनी सांस्कृतिक पहचान के लिए जरूरी मानता है। राज्य सरकार का तर्क है कि नवोदय विद्यालय योजना में अपनाई जाने वाली 'थ्री-लैंग्वेज फॉर्मूला' स्थानीय नियमों के खिलाफ है। चूंकि शिक्षा 'कॉन्करेंट लिस्ट' का हिस्सा है, इसलिए राज्य का कहना है कि भाषा तय करने का अधिकार उनके पास होना चाहिए।
दूसरी ओर, केंद्र सरकार का कहना है कि राज्य का मुख्य काम केवल बुनियादी ढांचे के लिए जमीन मुहैया कराना है। केंद्र का दावा है कि इन स्कूलों का करिकुलम भी तमिल को शामिल करता है, इसलिए यह राज्य की नीतियों के खिलाफ नहीं है।
अब आगे क्या?
यह मामला केंद्र के आदेशों और राज्य की स्वायत्तता के बीच घर्षण को दिखाता है। कोर्ट ने संज्ञान लिया कि दिसंबर 2025 के पिछले निर्देश का पालन अभी तक नहीं हुआ है, जिसके बाद यह नया डेडलाइन तय किया गया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 14 दिसंबर को होगी, जहां कोर्ट यह तय करेगा कि क्या इस योजना को राज्य में अनिवार्य रूप से लागू किया जा सकता है।
