Supreme Court: तमिलनाडु फ्लोर टेस्ट मामले में याचिका खारिज, सरकार को मिली बड़ी राहत

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Supreme Court: तमिलनाडु फ्लोर टेस्ट मामले में याचिका खारिज, सरकार को मिली बड़ी राहत

सुप्रीम कोर्ट ने मई **2026** के विधानसभा चुनावों के बाद तमिलनाडु असेंबली में कथित हॉर्स-ट्रेडिंग की CBI जांच की मांग वाली याचिका को ठुकरा दिया है। इस फैसले से राज्य की मौजूदा सरकार की स्थिरता पर उठ रहे सवालों पर पूर्णविराम लग गया है, जो बिजनेस और इन्वेस्टर्स के लिए एक पॉजिटिव संकेत है।

चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने तमिलनाडु विधानसभा में हुई कथित राजनीतिक खरीद-फरोख्त की जांच के लिए दायर याचिका को खारिज कर दिया है। याचिकाकर्ता एम. श्रीनिवासन ने 'तमिलगा वेट्री कषगम' (TVK) के मंत्री एन. आनंद और AIADMK के चार पूर्व विधायकों के आचरण को चुनौती दी थी। आरोप यह था कि इन विधायकों ने अपनी निष्ठा बदलकर फ्लोर टेस्ट के दौरान सत्ताधारी गठबंधन को बहुमत हासिल करने में मदद की थी।

सरकार की स्थिति और कोर्ट का रुख

इस फैसले के साथ ही मौजूदा प्रशासन के खिलाफ चल रही कानूनी चुनौती अब खत्म हो गई है। TVK, इंडियन नेशनल कांग्रेस, विदुथलाई चिरुथाईगल काची (VCK) और वामपंथी दलों का यह गठबंधन अब बिना किसी कानूनी अड़चन के अपना कामकाज जारी रखेगा। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से यह मांग की थी कि बिना स्पष्ट कारण इस्तीफा देने वाले विधायकों को आगामी उपचुनाव लड़ने से रोका जाए और उनसे नए चुनाव का खर्च वसूला जाए, जिसे कोर्ट ने मानने से इनकार कर दिया है।

बिजनेस और इन्वेस्टर्स पर असर

इन्वेस्टर्स और बिजनेस जगत के लिए यह फैसला राजनीतिक स्थिरता का प्रतीक है। तमिलनाडु में जारी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और नीतिगत फैसलों के लिए यह स्पष्टता बहुत जरूरी थी। कोर्ट ने विधायिका के आंतरिक मामलों में दखल न देकर यह साफ कर दिया है कि वह राजनीतिक प्रक्रियाओं और न्यायिक सीमाओं का सम्मान करती है। अब निवेशकों का पूरा ध्यान राज्य की एडमिनिस्ट्रेटिव पॉलिसीज और भविष्य के आर्थिक फैसलों पर टिक गया है, क्योंकि राजनीतिक अनिश्चितता का बादल पूरी तरह छंट चुका है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.